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UAE के 3 अरब डॉलर लौटाने के दबाव में पाकिस्तान, कर्ज चुकाने के लिए फिर ले रहा कर्ज का सहारा

The Hill India News
Last updated: April 14, 2026 6:03 am
The Hill India News
Published: April 14, 2026
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था एक बार फिर गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और बाहरी कर्ज के बोझ ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात इतने चुनौतीपूर्ण हो चुके हैं कि अब देश को पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए कर्ज की तलाश करनी पड़ रही है। ताजा झटका संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से लगा है, जिसने पाकिस्तान को दिए गए 3 अरब डॉलर के कर्ज को आगे बढ़ाने (रोलओवर) से इनकार कर दिया है और अपनी रकम वापस मांग ली है। यह फैसला पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

पिछले कई वर्षों से UAE पाकिस्तान को दिए गए कर्ज को समय-समय पर रोलओवर करता रहा है, जिससे पाकिस्तान को राहत मिलती रही। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, जिससे पाकिस्तान के सामने तत्काल भुगतान का संकट खड़ा हो गया है। मौजूदा समय में पाकिस्तान के पास लगभग 16.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो करीब तीन महीने के आयात के लिए ही पर्याप्त माना जाता है। ऐसे में अगर UAE का कर्ज चुकाना पड़ता है, तो यह भंडार और तेजी से घट सकता है।

इस संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार अब नए कर्ज के विकल्प तलाश रही है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने संकेत दिए हैं कि सरकार अन्य देशों से मदद लेने और अंतरराष्ट्रीय बैंकों से कर्ज जुटाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। हालांकि उन्होंने चीन और सऊदी अरब से संभावित सहायता पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया, लेकिन सूत्रों के अनुसार इन देशों के साथ पर्दे के पीछे बातचीत जारी है।

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने पाकिस्तान की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। तेल आयात पर निर्भर पाकिस्तान के लिए यह स्थिति विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है। आयात बिल बढ़ने से आर्थिक संतुलन बिगड़ रहा है और चालू खाते का घाटा बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है।

इस बीच पाकिस्तान ने वैश्विक बॉन्ड बाजार का रुख करने का फैसला किया है। सरकार चार साल के अंतराल के बाद फिर से यूरोबॉन्ड जारी करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही इस्लामिक सुकुक बॉन्ड और डॉलर-आधारित रुपया बॉन्ड भी लाने की योजना है। इन बॉन्ड्स के जरिए पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से धन जुटाने की कोशिश करेगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए इन बॉन्ड्स पर ब्याज दर काफी अधिक हो सकती है, जिससे भविष्य में कर्ज का बोझ और बढ़ सकता है।

एक और महत्वपूर्ण कदम के तहत पाकिस्तान पहली बार चीनी मुद्रा युआन में कर्ज लेने की योजना बना रहा है, जिसे ‘पांडा बॉन्ड’ कहा जाता है। सरकार की योजना है कि शुरुआती चरण में 25 करोड़ डॉलर के पांडा बॉन्ड जारी किए जाएं, जिसे बाद में बढ़ाकर 1 अरब डॉलर तक किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में एशियाई विकास बैंक (ADB) और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) पाकिस्तान की सहायता कर रहे हैं।

इसके अलावा पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से भी बड़ी उम्मीदें हैं। पाकिस्तान 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज के तहत अगली किस्त का इंतजार कर रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि IMF जल्द ही लगभग 1.3 अरब डॉलर की राशि जारी कर सकता है, जिससे पाकिस्तान को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि IMF की शर्तें सख्त होती हैं, जिनमें आर्थिक सुधार, सब्सिडी में कटौती और टैक्स बढ़ाने जैसे कदम शामिल होते हैं, जो आम जनता पर बोझ बढ़ा सकते हैं।

पाकिस्तान सरकार फिलहाल यह दावा कर रही है कि वह अपने सभी कर्जदाताओं को भुगतान करने में सक्षम है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि देश के पास ठोस बैकअप प्लान की कमी है। बार-बार कर्ज लेकर पुराने कर्ज चुकाने की रणनीति लंबे समय में आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर सकती है।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान को इस संकट से बाहर निकलने के लिए संरचनात्मक सुधारों की जरूरत है। निर्यात बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना, टैक्स सिस्टम को मजबूत बनाना और विदेशी निवेश आकर्षित करना जैसे कदम जरूरी हैं। जब तक ये सुधार नहीं किए जाते, तब तक देश कर्ज के इस चक्रव्यूह में फंसा रह सकता है।

कुल मिलाकर, UAE के कर्ज वापसी के फैसले ने पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों को उजागर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि शहबाज सरकार नए कर्ज के जरिए इस संकट से उबर पाती है या फिर देश को और गहरे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। फिलहाल पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना और वैश्विक स्तर पर विश्वास बनाए रखना है।

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