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जम्मू-कश्मीर: ‘टेरर इकोसिस्टम’ पर प्रहार, LG मनोज सिन्हा ने 5 और सरकारी कर्मचारियों को किया बर्खास्त; देश विरोधी नेटवर्क की टूटी कमर

The Hill India News
Last updated: January 13, 2026 12:45 pm
The Hill India News
Published: January 13, 2026
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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की जड़ों को पूरी तरह से समाप्त करने की दिशा में उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा के प्रशासन ने एक बार फिर कड़ा प्रहार किया है। मंगलवार को प्रशासन ने राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और आतंकी संगठनों से संबंधों के पुख्ता सबूत मिलने के बाद पांच और सरकारी कर्मचारियों को सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। उपराज्यपाल की इस निर्णायक कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सरकारी मशीनरी के भीतर छिपे ‘स्लीपर सेल्स’ और आतंकी बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद करना है।

Contents
सेवा से हटाए गए 5 कर्मचारियों की कुंडलीअब तक 85 कर्मचारियों पर गिरी गाज: ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेशसरकारी तंत्र में ‘टाइम-बम’ की तरह तैनात थे ये कर्मचारी2021 से शुरू हुआ निर्णायक अभियानसुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबीनए जम्मू-कश्मीर की ओर बढ़ते कदम

सेवा से हटाए गए 5 कर्मचारियों की कुंडली

अधिकारियों के अनुसार, बर्खास्त किए गए कर्मचारी विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात थे, लेकिन वे अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियों की आड़ में आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहे थे। इन नामों में शामिल हैं:

  1. मोहम्मद इशफाक: शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर तैनात थे।

  2. तारिक अहमद शाह: स्वास्थ्य विभाग में प्रयोगशाला तकनीशियन (Lab Technician)।

  3. बशीर अहमद मीर: सहायक लाइनमैन।

  4. फारूक अहमद भट: वन विभाग में वन क्षेत्र कर्मी।

  5. मोहम्मद यूसुफ: स्वास्थ्य विभाग में ड्राइवर।

जांच में सामने आया कि ये लोग लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के सक्रिय संपर्क में थे और उन्हें रणनीतिक सहयोग प्रदान कर रहे थे।


अब तक 85 कर्मचारियों पर गिरी गाज: ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पदभार संभालने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में अब तक कुल 85 सरकारी कर्मचारियों को आतंकी नेटवर्क का हिस्सा होने के कारण नौकरी से निकाला जा चुका है।

यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत की जा रही है, जो राष्ट्रपति या राज्यपाल को राज्य की सुरक्षा के हित में बिना किसी औपचारिक जांच के (यदि आवश्यक हो) कर्मचारी को बर्खास्त करने की शक्ति प्रदान करता है। प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि जो लोग सरकारी खजाने से वेतन लेकर देश की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं, उन्हें तंत्र में रहने का कोई अधिकार नहीं है।


सरकारी तंत्र में ‘टाइम-बम’ की तरह तैनात थे ये कर्मचारी

सुरक्षा एजेंसियों और सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और सीमा पार बैठे आतंकी आकाओं ने पिछले कई दशकों के दौरान योजनाबद्ध तरीके से अपने समर्थकों को सरकारी महकमों में शामिल करवाया था।

  • सक्रिय सहयोगी (Active Associates): ये कर्मचारी केवल हमदर्द नहीं थे, बल्कि ‘टाइम-बम’ की तरह काम कर रहे थे।

  • सूचनाओं का लीक होना: सरकारी पदों पर होने के कारण इनके पास महत्वपूर्ण सूचनाओं तक पहुंच थी, जिसका इस्तेमाल ये आतंकी हमलों की साजिश रचने और सुरक्षा बलों की आवाजाही की जानकारी देने के लिए करते थे।

  • लॉजिस्टिक्स सपोर्ट: ड्राइवर और लाइनमैन जैसे पदों का उपयोग हथियारों की सप्लाई और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराने में किया जा रहा था।


2021 से शुरू हुआ निर्णायक अभियान

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने साल 2021 में ‘टेरर इकोसिस्टम’ को बेनकाब करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स और व्यापक अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान का उद्देश्य केवल बंदूकधारी आतंकवादियों को मारना नहीं, बल्कि उनके पीछे खड़े वित्तपोषकों (Funders), ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) और सरकारी छद्मवेष में बैठे देशद्रोहियों की कमर तोड़ना है।

अधिकारी ने बताया कि सरकारी तंत्र के भीतर मौजूद इस आतंकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना सबसे बड़ी चुनौती थी, क्योंकि ये लोग सिस्टम के भीतर रहकर उसे खोखला कर रहे थे। पिछले पांच सालों में सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बिठाकर मनोज सिन्हा ने आतंकी ढांचे को काफी हद तक ध्वस्त करने में सफलता पाई है।


सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी

हालिया बर्खास्तगी को सुरक्षा एजेंसियों की एक बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ये कर्मचारी युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें आतंकी संगठनों में भर्ती होने के लिए उकसाने का काम भी कर रहे थे। शिक्षा विभाग में तैनात शिक्षक जैसे पदों का दुरुपयोग करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरा माना गया है।

नए जम्मू-कश्मीर की ओर बढ़ते कदम

अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर में विकास और सुरक्षा को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की यह कार्रवाई दर्शाती है कि केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन अब किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। सरकारी तंत्र को साफ-सुथरा और राष्ट्रभक्त बनाना इस मिशन की प्राथमिकता है।

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