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उत्तराखंडफीचर्ड

यूरोप में गूंजी देवभूमि की लोक–आस्था: प्रीतम भरतवाण के जागरों से स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे और जर्मनी हुआ भाव-विभोर

The Hill India News
Last updated: December 30, 2025 11:53 am
The Hill India News
Published: December 30, 2025
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प्रीतम भरतवाण उत्तराखंड के उन विरले लोक गायकों में से हैं, जिन्होंने जागर, ढोल सागर और लोक आध्यात्मिक गायन को केवल संगीत नहीं, बल्कि देव संवाद और सांस्कृतिक साधना का रूप दिया। उन्हें जागर सम्राट भी कहा जाता है। उनके स्वर में पहाड़ की पीड़ा, श्रद्धा, आस्था और लोकविश्वास स्वाभाविक रूप से झलकता है। दशकों से वे राज राजेश्वरी, भैरव, नर्सिंग, नागराजा सहित अनेक देवी–देवताओं के जागरों को जीवंत करते आए हैं। उनकी प्रस्तुति श्रोताओं को उस आध्यात्मिक अनुभूति तक ले जाती है, जहाँ लोक, परंपरा और भक्ति एकाकार हो जाते हैं इसीलिए उनके जागरों में देवी देवताओं के अवतरण की अनुभूति का अनुभव दर्शक स्वयं करते रहे हैं।

उन्होंने उत्तराखंड के सुदूर गांवों से लेकर देश–विदेश के बड़े मंचों तक लोकसंस्कृति का परचम लहराया है। कैमरा गीत, किमसाड़ी हाट, सरूली जैसे लोकगीतों के साथ साथ शुद्ध पारंपरिक जागर शैली को उन्होंने नई पीढ़ी तक पहुँचाया। उनका योगदान उत्तराखंड की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रचारित करने में ऐतिहासिक माना जाता है।

इसी सांस्कृतिक साधना का सशक्त प्रमाण बना “प्रीतम भरतवाण इंटरनेशनल गीत जागर–ढोल सागर यूरोपियन टूर”। टूर के अंतर्गत 28 दिसंबर 2025 को Zurich, Switzerland में Uttarakhand Association of Switzerland द्वारा आयोजित भव्य कंसर्ट में प्रवासी उत्तराखंडी भाई–बहनों ने चार घंटे तक चले जागर गीतों का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत ढोल पूजा और तिलक से हुई, कलाकारों का सम्मान किया गया और लगभग 300 दर्शकों की उपस्थिति में “मै जांदौ मेरी बसंती दूर देशु पार”, “राज राजेश्वरी”, “भैरव”, “नर्सिंग”, “नागराजा” जैसे देव जागरों से सभागार आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
“कैमरा गीत”, “किमसाड़ी हाट”, “सरूली” सहित सभी हिट प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक भाव विभोर हो उठे हर ओर आनंद और श्रद्धा का संगम दिखा।

टूर के इसी क्रम में आज जर्मनी के Konstanz, Germany में कंसर्ट आयोजित है। इस यात्रा में प्रीतम भरतवाण के साथ मंच साझा कर रहे हैं लोकगायक Surtam Bharatwan, म्यूज़िक डायरेक्टर Surendra Koli और ढोलक पर रिद्मिस्ट Yogendra Singh जिनकी सधी हुई संगत ने प्रस्तुतियों को और सशक्त बनाया।

इससे पूर्व 24 दिसंबर को Oslo, Norway में आयोजित कार्यक्रम में करीब 500 प्रवासी उत्तराखंडी शामिल हुए, जहाँ भारतीय दूतावास के अधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, यह यूरोपियन टूर केवल कंसर्ट्स की श्रृंखला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक उद्घोष है। प्रीतम भरतवाण के स्वर में देवभूमि की आत्मा गूंज रही है जो प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए विश्व मंच पर लोक–आस्था का परचम लहरा रही है।

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