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कश्मीर में हाड़ कंपाने वाली सर्दी: बिजली कटौती, जमे पाइप और महंगाई ने लोगों की ज़िंदगी कर दी मुश्किल

The Hill India News
Last updated: December 22, 2025 1:46 am
The Hill India News
Published: December 22, 2025
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कश्मीर।
कश्मीर में सर्दियों के शुरू होते ही घाटी एक बार फिर कड़ाके की ठंड, लंबी बिजली कटौती और जमे हुए पाइपों से जूझ रही है, जिससे आम लोगों की रोज़मर्रा ज़िंदगी पर बड़ा असर पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्दियों का पारंपरिक सौंदर्य अब महंगाई, कालाबाजारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के आगे फीका पड़ गया है।

Contents
बिजली कटौती और जमे पाइपों से दोहरी मारमहंगाई, कालाबाजारी और जलवायु संकटप्रशासनिक तैयारी पर सवाल, लोगों की अपेक्षाएँ

बिजली कटौती और जमे पाइपों से दोहरी मार

तापमान शून्य से काफी नीचे जाते ही हीटिंग डिवाइस, गर्म कपड़े और ईंधन की मांग तेज़ हो जाती है, लेकिन अनियमित पावर सप्लाई के कारण लोग अक्सर ठंड और अंधेरे में रात काटने को मजबूर हैं। कई इलाकों में घोषित शेड्यूल से ज्यादा और बिना सूचना के बिजली कट लग रहे हैं, जिससे हीटर, गीजर और अन्य उपकरण बेकार हो जाते हैं।

लगातार पाला पड़ने से कई जगह पानी की पाइपलाइन और टंकियां जम जाती हैं, जिससे लोगों को पीने और रोज़मर्रा के इस्तेमाल के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है या टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। पिछली सर्दियों में भी इसी तरह जमे पाइपों ने कई इलाकों को गंभीर पानी संकट में धकेल दिया था, जो इस बार भी दोहराता दिख रहा है।

महंगाई, कालाबाजारी और जलवायु संकट

ठंड बढ़ते ही लकड़ी, कोयला, केरोसिन, गैस सिलेंडर और जरूरी खाद्य सामग्री की मांग बढ़ जाती है, जिसके साथ ही दामों में तेज़ उछाल और कालाबाजारी की शिकायतें आम हो जाती हैं। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए पर्याप्त हीटिंग और राशन जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है, जबकि कम आय वाले परिवार अक्सर स्वास्थ्य और सुरक्षा से समझौता करके भी गुज़ारा करने को मजबूर हैं।

जलवायु परिवर्तन ने कश्मीर की सर्दियों की प्रकृति भी बदल दी है; कभी अत्यधिक ठंड और बर्फबारी, तो कभी बिल्कुल सूखी और बर्फ रहित सर्दी, दोनों तरह की स्थितियाँ रोज़गार, जल-संसाधन और पर्यटन पर असर डाल रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बदली हुई बर्फबारी और तापमान पैटर्न आने वाले वर्षों में क्षेत्र की पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।

प्रशासनिक तैयारी पर सवाल, लोगों की अपेक्षाएँ

लोगों का कहना है कि सर्दियों के हर सीजन से पहले प्रशासन पावर सप्लाई, पानी, सड़क सफाई और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई को लेकर बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर व्यवस्थाएँ अक्सर नाकाफी साबित होती हैं। इस बार भी ठंड बढ़ने के साथ बिजली, पानी और राशन की सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं, जबकि सरकार की ओर से समीक्षा बैठकों और तैयारियों के दावे जारी हैं।

कई इलाकों में लोग मोहल्ला स्तर पर एक-दूसरे की मदद, साझा हीटिंग, सामूहिक राशन स्टॉक और स्थानीय नेटवर्क के सहारे सर्दी से मुकाबला कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांग है कि प्रशासन जरूरी वस्तुओं की नियमित आपूर्ति, कीमतों पर सख्त नियंत्रण और पावर–वाटर इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने पर तुरंत फोकस करे, ताकि आने वाले दिनों में सर्दियां और असहनीय न बनें।

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