By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: Uttarakhand: टिहरी में RRP ने आंदोलनकारी गंभीर सिंह कठैत को शहीद का दर्जा देने की मांग तेज की
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > Uttarakhand: टिहरी में RRP ने आंदोलनकारी गंभीर सिंह कठैत को शहीद का दर्जा देने की मांग तेज की
उत्तराखंडफीचर्ड

Uttarakhand: टिहरी में RRP ने आंदोलनकारी गंभीर सिंह कठैत को शहीद का दर्जा देने की मांग तेज की

The Hill India News
Last updated: September 20, 2025 1:51 pm
The Hill India News
Published: September 20, 2025
Share
CREATOR: gd-jpeg v1.0 (using IJG JPEG v62), quality = 82?
SHARE

टिहरी। उत्तराखंड के राज्य आंदोलन के वीर सपूतों के सम्मान को लेकर राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी (RRP) ने अपनी मुहिम और तेज कर दी है। शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल, सुभाष नौटियाल और उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल ने टिहरी की जिलाधिकारी निकिता खंडेलवाल से मुलाकात कर स्वर्गीय गंभीर सिंह कठैत को उत्तराखंड आंदोलनकारी घोषित कर शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।

Contents
गंभीर सिंह कठैत का बलिदान और आंदोलन में भूमिकाआंदोलनकारी मंच की मांगRRP की प्रतिबद्धताअधिकारियों को सौंपा ज्ञापनसामाजिक और राजनीतिक महत्वस्थानीय प्रतिक्रिया

गंभीर सिंह कठैत का बलिदान और आंदोलन में भूमिका

RRP नेताओं ने बताया कि स्व. गंभीर सिंह कठैत टिहरी जिले के निवासी थे और उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2004 में नई टिहरी नगर में मुकदमा वापसी की मांग को लेकर हुए आंदोलन में गंभीर सिंह कठैत शहीद हो गए।

शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा, “आज 2025 में भी गंभीर सिंह कठैत को न तो राज्य आंदोलनकारी घोषित किया गया है और न ही उन्हें शहीद का दर्जा मिला है। उनके साहस और बलिदान को आधिकारिक मान्यता मिलना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि गंभीर सिंह कठैत को 5 जनवरी 1994 और 28 मार्च 1994 को दो बार जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उनके संघर्ष और योगदान को अब तक उचित सम्मान नहीं मिला।


आंदोलनकारी मंच की मांग

देवेंद्र नौडियाल ने कहा कि गंभीर सिंह कठैत का बलिदान उत्तराखंड के लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है। “दुर्भाग्य है कि राज्य गठन के 25 साल बाद भी उन्हें आधिकारिक मान्यता नहीं मिली। उनकी माता द्वारा बार-बार यह मांग उठाई गई कि टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम का नाम और उनकी प्रतिमा स्थापना उनके नाम पर की जाए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्तिगत सम्मान का मामला नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को राज्य आंदोलन के वीरों के बलिदान की प्रेरणा देने का मामला भी है।


RRP की प्रतिबद्धता

पार्टी नेता सुभाष नौटियाल ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी पूरी मजबूती से यह मांग उठाएगी कि स्व. कठैत को आंदोलनकारी और शहीद का दर्जा मिले। उन्होंने कहा, “इससे केवल उनके परिवार को सम्मान और पेंशन जैसी सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उनके बलिदान को यादगार बनाया जा सकेगा।”

शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा कि राज्य आंदोलन में अनेकों वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति दी, जिनके बलिदान के कारण वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य का गठन संभव हो सका। उन्होंने सरकार से मांग की कि गंभीर सिंह कठैत जैसे योद्धाओं को न्याय और सम्मान दिया जाए।


अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन

RRP नेताओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात के दौरान ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट किया कि सरकार को आवश्यक आदेश जारी करके गंभीर सिंह कठैत को आधिकारिक आंदोलनकारी और शहीद का दर्जा देना चाहिए। ज्ञापन में कहा गया कि उनके परिवार को पेंशन, सम्मान और सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाएं।

इसके अलावा पार्टी ने इस मुद्दे को राज्य और राष्ट्रीय मीडिया में उठाने का आश्वासन भी दिया। पार्टी नेताओं ने जोर देकर कहा कि आंदोलनकारियों के सम्मान की लड़ाई को लगातार जारी रखा जाएगा और राज्य सरकार को इसके प्रति जिम्मेदार ठहराया जाएगा।


सामाजिक और राजनीतिक महत्व

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुए आंदोलनकारियों को उचित मान्यता न मिलना एक सामाजिक और ऐतिहासिक चुनौती है। ऐसा न होने पर युवा पीढ़ी में आंदोलन और देशभक्ति के महत्व को लेकर समझ में कमी आ सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के वीरों का सम्मान केवल ऐतिहासिक न्याय का विषय नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।


स्थानीय प्रतिक्रिया

स्थानीय लोगों ने भी RRP की पहल का स्वागत किया। ग्रामीणों ने कहा कि गंभीर सिंह कठैत जैसे वीरों का बलिदान हर उत्तराखंडी के लिए गर्व का विषय है। उनका कहना है कि राज्य आंदोलन के शहीदों को उचित सम्मान मिलने से समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और युवा पीढ़ी में राज्यभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी।

टिहरी में RRP की यह पहल केवल एक आंदोलनकारी को शहीद घोषित कराने तक सीमित नहीं है। यह पूरे उत्तराखंड राज्य आंदोलन के वीरों के सम्मान और उनके बलिदान को यादगार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्वर्गीय गंभीर सिंह कठैत के परिवार और समाज के लिए यह मामला न केवल समानता और न्याय का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राज्य आंदोलन के इतिहास और वीरता को संरक्षित रखने का माध्यम भी बनता है।

You Might Also Like

म्यामां के 416 सैन्यकर्मी घुस आए थे भारत में, सेना प्रमुख ने कहा- ‘कड़ी निगरानी रखी जा रही है’
विपक्ष पर हमला बोलते हुए सदन में भड़के रेल मंत्री, कहा- ‘हम रील बनाने वाले नहीं…’
New Delhi: नाम, रैंक और रोल नंबर एक ही जैसा, सिविल सेवा परीक्षा 2022 के परिणाम में दो आयशा के बीच असमंजस
उत्तराखण्ड : मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने किया मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन
जनमानस की सुरक्षा सर्वोपरि: सेफ्टी ऑडिट के बाद ही शुरू हुआ देहरादून-मसूरी आवागमन
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

UPL क्लोजिंग से पहले गरमाया विवाद: मासूम शर्मा के शो के खिलाफ UKD का प्रदर्शन, स्टेडियम के बाहर नारेबाजी से बढ़ा सियासी पारा

The Hill India News
The Hill India News
October 1, 2026
हरिद्वार को बड़ी सौगात: अब यहीं तैयार होंगे MBBS डॉक्टर, ESI मेडिकल कॉलेज को मिली मंजूरी; 50 सीटों से होगी शुरुआत
‘एक कचौड़ी, दो समोसा… इन मर्दों का क्या भरोसा’ से ‘नारी अपने आप की’ तक, दिल्ली की सड़कों पर गूंजा Gen Z का गुस्सा; DU-JNU-जामिया की छात्राओं ने उठाए महिला सुरक्षा पर सवाल
सूखती धाराओं से फिर बहने लगी हेवल नदी… उत्तराखंड के IFS धर्म सिंह मीणा को Eco-Warrior Award 2026, वैज्ञानिक मॉडल ने बदली जलस्रोतों की तस्वीर
10 लाख का बिजली बिल नहीं भरा तो कट गई BSNL टावर की बिजली, 15 ग्राम सभाओं में नेटवर्क ठप… फोन हुए ‘शोपीस’, ग्रामीण बोले- आपात स्थिति में कैसे बचेंगे?
‘पलटूराम’ से ‘वोट चोरी’ तक… हरिद्वार में हरीश रावत के तीखे तेवर, ‘टाइगर इज बैक’ पोस्टर के साथ निकली धन्यवाद संवाद यात्रा
दिवाली पर पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख! पूरी तरह बैन नहीं, लेकिन 24 घंटे पटाखे चलाने की भी नहीं मिलेगी छूट; तय समय पर ही इस्तेमाल के संकेत
I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक में बड़ा ऐलान! खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ खोला मोर्चा, SIR से लेकर बैलेट पेपर तक 6 बड़ी मांगों पर जोर
महेंद्र भट्ट के गृह क्षेत्र में ABVP को बड़ा झटका! नागनाथ पोखरी छात्रसंघ चुनाव में आर्यन ग्रुप का दबदबा, सभी प्रमुख पदों पर जीत
झबरेड़ा डबल मर्डर का आरोपी अमन मुठभेड़ में गिरफ्तार, पैर में लगी गोली; बहन और पड़ोसी युवक की हत्या के बाद चार दिन से था फरार
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?