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उत्तराखंड

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों पर लगी रोक अगले 24 घंटे तक रहेगी जारी

The Hill India Desk
Last updated: May 7, 2025 3:03 pm
The Hill India Desk
Published: May 7, 2025
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जिला प्रशासन एवं केंद्र से आई चिकित्सकों की टीम लगातार कर रही सैंपलिंग एवं जांच
आज पंतनगर विश्वविद्यालय से भी आ रहा विशेषज्ञ चिकित्सकों का दल
सही समय पर इलाज एवं आराम से पशु जल्द होंगे स्वस्थ-मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
घरेलू उपचार या अफवाहों पर न करें विश्वास, केवल विभागीय पशु चिकित्सकों से ही करें संपर्क
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा के दौरान घोड़े-खच्चरों के बीच इक्वाइन इन्फ्लुएंजा नामक विषाणुजनित रोग के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यात्रा मार्ग पर एक दिन के लिए घोड़े खच्चरों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी, जिसे फिर से 24 घंटे के लिए बढ़ा दिया गया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ आशीश रावत ने बताया कि चिकित्सकों के साथ ही राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान हिसार से विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक दल जनपद में पहुंच चुका है, जो लगातार घोड़े-खच्चरों की बीमारी एवं स्थिति पर नजर रख रहा है।
उन्होंने बताया कि मंगलवार से चिकित्सक गौरीकुंड़ क्षेत्र में घोड़े-खच्चरों के सैंपल ले रहे हैं और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है, इसलिए सैंपलिंग प्रक्रिया के पूरी होने एवं जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा के चलते यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों के परिचालन पर पुनः आगामी 24 घंटे तक पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है। इस अवधि में पशुओं के संचालन पर पूर्णतया रोक रहेगी, जिस दौरान अस्वस्थ पशुओं को पृथक कर क्वारंटाइन किया जाएगा एवं राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान हिसार को प्रेषित की गई जांच रिपोर्ट आने तक रोक जारी रहेगी। रोक हटाने संबंधी निर्णय इसके पश्चात लिया जाएगा।
कहा कि पशुपालन विभाग ने तत्काल प्रभाव से अतिरिक्त पशु चिकित्सकों की तैनाती की है। गौरीकुंड समेत अन्य संवेदनशील स्थलों पर सरकारी दवाएं और उपचार सुविधाएं अत्यंत रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में कुछ पशुओं में पेचिश जैसे तीव्र लक्षण भी देखे जा रहे हैं, इस गंभीर परिस्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार से विशेषज्ञों की टीम बुलाकर जांच प्रारंभ की गई है।
डॉ आशीश रावत ने बताया कि प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ इन्फेक्शियस डिजीजेज इन एनिमल्स 2009 अधिनियम के प्राविधानों के अंतर्गत अस्वस्थ पशु को अलग रखने एवं अस्वस्थ पशु से कार्य ना कराने का उत्तर दायित्व पूर्णतः पशु मालिक का होगा एवं यदि ऐसा किया जाता है तो संबंधित पशु मालिक के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
बॉक्स
पूर्व में भी हो चुका है वायरस का प्रकोप
रुद्रप्रयाग। पशु चिकित्सकों का कहना है कि इक्वाइन इन्फ्लुएंजा मुख्यत श्वसन मार्ग से फैलता है और बेहद तेजी से एक पशु से दूसरे पशु में संक्रमण फैला सकता है। वर्ष 2009 में भी इस रोग ने केदारनाथ यात्रा को प्रभावित किया था। फिलहाल इस रोग की कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, लेकिन समय पर इलाज और आराम से पशु जल्दी स्वस्थ हो सकते हैं। गौरीकुंड और आसपास के क्षेत्रों में जैसे ही लक्षण सामने आए, संबंधित गांवों को प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया गया। जनपद में बाहर से आने वाले प्रत्येक घोड़े और खच्चर की गहन स्क्रीनिंग की जा रही है। बीते एक माह में राज्य भर के 16 हजार से अधिक पशुओं की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। केवल पूर्णतः स्वस्थ पशुओं को ही जिले में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।

यात्रा मार्ग पर पर्याप्त विशेषज्ञों की टीम तैनात,
रुद्रप्रयाग। पुशुपाल विभाग की ओर से स्थिति से निपटने के लिए जनपद में एक मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी, दो उप मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी, 20 पशु चिकित्सक, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के दो वैज्ञानिकों की टीम तैनात की गई है। इसके अतिरिक्त बुधवार को पंतनगर विश्वविद्यालय के दो विशेषज्ञ डॉक्टर भी केदारघाटी पहुचेंगे। यह दोनों विशेषज्ञ डॉक्टर वर्ष 2009 में भी इस बीमारी के उपचार में कार्य कर चुके हैं।

डीएम ने किया यात्रा संचालन में सहयोग की अपील,
रुद्रप्रयाग। जिलाधिकारी डॉ सौरभ गहरवार ने स्पष्ट किया कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तीर्थयात्री डंडी, कंडी और पिट्ठू जैसे वैकल्पिक माध्यमों से यात्रा करें। व्यापारियों से भी अनुरोध किया गया है कि वे सामान ढुलाई के लिए इन विकल्पों का प्रयोग करें, ताकि बीमार पशुओं को आराम मिल सके और संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। कहा कि “यह संकट केवल पशुधन का नहीं, बल्कि हमारी यात्रा व्यवस्था और स्थानीय आर्थिकी से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे ही लक्षण सामने आए, तुरंत स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन और विशेषज्ञों की सहायता शुरू कर दी गई थी। पंतनगर, देहरादून और हिसार से परामर्श लेकर सभी आवश्यक टीमें गठित की जा चुकी हैं। उन्होंने अपील की कि वे किसी भी प्रकार के घरेलू उपचार या अफवाहों पर विश्वास न करें। केवल विभागीय पशु चिकित्सकों से ही संपर्क करें और बीमारी के किसी भी लक्षण को नज़र अंदाज़ न करें।

स्थानीय निवासियों, व्यापारियों ने जताया पशुपालन विभाग का आभार,
रुद्रप्रयाग। घोड़े खच्चरों में फैले संक्रमण के बीच स्थानीय निवासियों, व्यवसायियों ने भी घोड़े-खच्चरों की व्यापक जांच की मांग की। इनमें प्रधान संगठन उखीमठ के अध्यक्ष सुभाष रावत के साथ-साथ अवतार नेगी, सुरेंद्र रावत एवं संदीप पुष्पवाण ने प्रशासन से 24 घंटे से लेकर चार दिन तक के लिए घोड़े खच्चरों की आवाजाही पर रोक की मांग की थी। चिकित्सकों द्वारा व्यापक स्तर पर जांच करने एवं 24 घंटे के लिए आवाजाही पर रोक को लेकर उन्होंने पशुपालन विभाग का धन्यवाद भी ज्ञापित किया।

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