By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: 1971 का वो युद्ध जब तय हो गई पाकिस्तान की हार, 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने किया था भारतीय सेना के सामने सरेंडर
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > 1971 का वो युद्ध जब तय हो गई पाकिस्तान की हार, 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने किया था भारतीय सेना के सामने सरेंडर
देशफीचर्ड

1971 का वो युद्ध जब तय हो गई पाकिस्तान की हार, 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने किया था भारतीय सेना के सामने सरेंडर

The Hill India News
Last updated: December 16, 2023 2:41 am
The Hill India News
Published: December 16, 2023
Share
फ़ाइल फ़ोटो
SHARE

दिल्ली: 16 दिसंबर की तारीख भारत और बांग्लादेश के इतिहास में काफी मायने रखती है. भारत में इस दिन को विजय दिवस तो बांग्लादेश में ‘बिजॉय दिवोस’ के रूप में मनाया जाता है. दरअसल 16 दिसंबर 1971 को भारत ने 13 दिन चले युद्ध में पाकिस्तान को परास्त कर दिया था और इससे एक नए देश का जन्म हुआ, जिसे बांग्लादेश कहा जाता है. पाकिस्तानी सेना के 93,000 सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर किया था. इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी तीनों सेनाओं- थल सेना, वायु सेना और नौसेना का इस्तेमाल किया और उसे बुरी तरह धूल चटाई. पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए और एक नए देश को पैदा कर दिया.

पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तान की सेना ने वहां के लोगों पर जुर्म ढहाए और उन्हें यातनाएं दीं. लाखों लोगों को मारा गया और महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया. हालात ये हुए कि पूर्वी पाकिस्तान से लोग भारत में शरण लेने आने लगे. इनकी संख्या लाखों में थी. ऐसे में भारत चाहता था कि इस इलाके में सैन्य कार्रवाई की जाए, जिससे वहां शांति स्थापित हो. अप्रैल 1971 में भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सेना प्रमुख सैम मानेकशॉ से युद्ध लड़ने को कहा, लेकिन उन्होंने उस समय हालातों को उचित नहीं समझा. सेना की तरफ से युद्ध लड़ने के लिए कुछ महीनों का समय मांगा गया. भारत नवंबर के महीने में पूरी तैयारी के साथ युद्ध में कूदने को तैयार था. इस बीच भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में विद्रोह कर रही मुक्ति वाहिनी सेना को समर्थन दिया और पाकिस्तानी सेना का सामना करने के लिए ट्रेनिंग भी दी. इस बीच पाकिस्तान को भारत की रणनीति समझ आ रही थी.

इधर पाकिस्तान जान रहा था कि भारत कभी भी उसके खिलाफ युद्ध कर सकता है. ऐसे में उसने पहले ही भारत पर हमला कर दिया. 3 दिसंबर को पाकिस्तान की वायु सेना ने भारत के कई एयरबेस पर हमले कर दिए. पाकिस्तान की तरफ से श्रीनगर, पठानकोट, अंबाला, आगरा, जोधपुर, जैसलमेर, भुज और जामनगर में एक साथ हमले किए गए. पाकिस्तान ने इस बात का भी फायदा उठाना चाह कि अभी भारत का ज्यादा फोकस पूर्वी पाकिस्तान की तरफ है और वो पश्चिम में कुछ कमजोर है. पाकिस्तान ने जैसलमेर के लोंगेवाला पर हमला कर दिया. यहां भारत के 120 जवानों ने ही पूरी तैयारी से आ रही पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे कर दिए.

4 दिसंबर की रात को यहां भयंकर लड़ाई चली. पाकिस्तान को इसमें काफी ज्यादा नुकसान हुआ. सुबह होते ही इंडियन एयरफोर्स ने मोर्चा संभाल लिया और हंटर लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान की तरफ बुरी तरह तबाही मचा दी. पाकिस्तानी टैंकों को पूरी तरह से तबाह कर दिया. युद्ध की शुरुआत पाकिस्तान की तरफ से की गई, लेकिन भारत ने पहले दिन से ही पाकिस्तान को करारा जवाब देना शुरू कर दिया. इस बीच भारतीय नौसेना ने भी मोर्चा संभाल लिया. 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट या ऑपरेशन त्रिशूल लॉन्च कर दिया. भारतीय जहाजों ने एंटी-शिप मिसाइलें दागीं. इससे पाकिस्तान के कराची बंदरगाह को भारी नुकसान पहुंचा. इंडियन नेवी के इस ऑपरेशन से पाकिस्तानी नौसेना को भारी नुकसान हुआ.

भारत के आईएनएस विक्रांत ने पाकिस्तान को पूर्वी पाकिस्तान से पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया. इस पर मौजूद लड़ाकू विमानों ने पूर्वी पाकिस्तान में स्थित चटगांव बंदरगाह को तबाह कर दिया था. चटगांव बंदरगाह पाकिस्तानी नौसेना का प्रमुख ठिकाना था.  पाकिस्तान ने आईएनएस विक्रांत को खत्म करने की प्लानिंग की और इसके लिए अपनी सबसे बड़ी और ताकतवर पनडुब्बी PNS गाजी को भेजा गया. भारतीय खुफिया एजेंसियों को इस बारे में जानकारी लग गई और फिर किसी भी तरह INS विक्रांत को बचाने की योजना तैयार की गई. पीएनएस गाजी पाकिस्तान को अमेरिका से मिली थी.

जब भारतीय थल सेना ने गाजी को डुबो दिया तो इसका डुब जाना अमेरिका के लिए भी एक बड़ा झटका था. इससे पाकिस्तान के मनोबल पर भी गहरा असर पड़ा. हर मोर्चे पर पाकिस्तान को झटके लग रहे थे. अपनी हार तय देखते हुए पाकिस्तान ने भारत को रोकने के लिए अमेरिका से मदद मांगी और यूएन तक भी पहुंच गया. अमेरिका युद्धविराम के लिए यूएन में प्रस्ताव लाया, लेकिन रूस ने भारत का साथ दिया और इसके खिलाफ वीटो कर दिया. अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद के लिए भारत के खिलाफ बंगाल की खाड़ी में 7वां बेड़ा भेज दिया. इस बेड़े में 50 से 70 जहाज, 150 विमान और हजारों नाविक और नौसैनिक होते हैं. अमेरिका ने बंगाल की खाड़ी में टास्क फोर्स 74 तैनात की थी.  ब्रिटेन ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर एचएमएस ईगल को अरब सागर में भेजा. ये सब भारत को घेरने और दबाव बनाने के लिए हो रहा था.

इसी दौरान रूस पूरी तरह से भारत की मदद के लिए खड़ा हो गया. इसी साल भारत और रूस के बीच ‘शांति और दोस्ती’ संधि हुई थी. इसी के चलते रूस भारत की मदद के लिए आगे आया. रूस ने परमाणु हथियार से लैस बेड़े को तैनात कर दिया. रूस की पनडुब्बियां पूरी तरह से निगरानी रखे हुए थीं. रूस के जहाजों के ग्रुप को देखकर ब्रिटेन के जहाज ने अमेरिकी बेड़े को मैसेज किया कि हमें बहुत देर हो गई है. उस समय रूस ने भारत के साथ सच्ची दोस्ती निभाई थी. 3 दिसंबर को शुरू हुआ युद्ध 13 दिन बाद 16 दिसंबर को समाप्त हो गया. इसी दिन ढाका में पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी ने भारत के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर कर दिया. इस युद्ध की कहानियां भारत और उसकी सेना के शौर्य को बयां करती हैं.

You Might Also Like

उत्तराखण्ड : अब महिलाओं को क्षैतिज आरक्षण और धर्मांतरण पर भी बना कानून
Mumbai: पूर्व NCB ऑफिसर समीर वानखड़े को कोर्ट से मिली फटकार
देहरादून प्रशासन ने छेड़ी नशे के खिलाफ निर्णायक जंग, ‘ड्रग्स फ्री देवभूमि’ बनाने की शुरुआत
देहरादून में 94 फीट ऊंचे ‘झंडे जी’ का आरोहण, लाखों संगतों के जयकारों से गूंजी दून घाटी
हैवान टीचर ने अपने स्कूल की छात्राओं से किया रेप, पुलिस ने किया खुलासा
TAGGED:93000 Pakistani soldiersPakistan's defeat was certainsurrendered Indian Armywar of 1971
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

UPL क्लोजिंग से पहले गरमाया विवाद: मासूम शर्मा के शो के खिलाफ UKD का प्रदर्शन, स्टेडियम के बाहर नारेबाजी से बढ़ा सियासी पारा

The Hill India News
The Hill India News
October 1, 2026
हरिद्वार को बड़ी सौगात: अब यहीं तैयार होंगे MBBS डॉक्टर, ESI मेडिकल कॉलेज को मिली मंजूरी; 50 सीटों से होगी शुरुआत
‘एक कचौड़ी, दो समोसा… इन मर्दों का क्या भरोसा’ से ‘नारी अपने आप की’ तक, दिल्ली की सड़कों पर गूंजा Gen Z का गुस्सा; DU-JNU-जामिया की छात्राओं ने उठाए महिला सुरक्षा पर सवाल
सूखती धाराओं से फिर बहने लगी हेवल नदी… उत्तराखंड के IFS धर्म सिंह मीणा को Eco-Warrior Award 2026, वैज्ञानिक मॉडल ने बदली जलस्रोतों की तस्वीर
10 लाख का बिजली बिल नहीं भरा तो कट गई BSNL टावर की बिजली, 15 ग्राम सभाओं में नेटवर्क ठप… फोन हुए ‘शोपीस’, ग्रामीण बोले- आपात स्थिति में कैसे बचेंगे?
‘पलटूराम’ से ‘वोट चोरी’ तक… हरिद्वार में हरीश रावत के तीखे तेवर, ‘टाइगर इज बैक’ पोस्टर के साथ निकली धन्यवाद संवाद यात्रा
दिवाली पर पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख! पूरी तरह बैन नहीं, लेकिन 24 घंटे पटाखे चलाने की भी नहीं मिलेगी छूट; तय समय पर ही इस्तेमाल के संकेत
I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक में बड़ा ऐलान! खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ खोला मोर्चा, SIR से लेकर बैलेट पेपर तक 6 बड़ी मांगों पर जोर
महेंद्र भट्ट के गृह क्षेत्र में ABVP को बड़ा झटका! नागनाथ पोखरी छात्रसंघ चुनाव में आर्यन ग्रुप का दबदबा, सभी प्रमुख पदों पर जीत
झबरेड़ा डबल मर्डर का आरोपी अमन मुठभेड़ में गिरफ्तार, पैर में लगी गोली; बहन और पड़ोसी युवक की हत्या के बाद चार दिन से था फरार
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?