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Reading: ’30 करोड़ का इनाम भी दान कर दिया’: जानिए उस महान इंसान की कहानी, जिन्हें सुपरस्टार रजनीकांत ने कहा- ‘मैं आपको पिता का दर्जा देना चाहता हूं’
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The Hill India > Blog > देश > ’30 करोड़ का इनाम भी दान कर दिया’: जानिए उस महान इंसान की कहानी, जिन्हें सुपरस्टार रजनीकांत ने कहा- ‘मैं आपको पिता का दर्जा देना चाहता हूं’
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’30 करोड़ का इनाम भी दान कर दिया’: जानिए उस महान इंसान की कहानी, जिन्हें सुपरस्टार रजनीकांत ने कहा- ‘मैं आपको पिता का दर्जा देना चाहता हूं’

The Hill India News
Last updated: August 1, 2026 5:13 am
The Hill India News
Published: August 1, 2026
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दुनिया में ऐसे लोग बहुत कम होते हैं जो अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जीते हैं। जिनकी पहचान उनके बैंक बैलेंस से नहीं, बल्कि उनके सेवा भाव, त्याग और मानवता से होती है। ऐसे ही एक असाधारण व्यक्तित्व हैं पालम कल्याणसुंदरम, जिनकी जीवन यात्रा आज करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उन्होंने न केवल अपनी पूरी नौकरी की कमाई जरूरतमंदों को दान कर दी, बल्कि करोड़ों रुपये का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी बिना एक पल सोचे गरीबों के नाम कर दिया। उनकी निस्वार्थ सेवा से प्रभावित होकर भारत के सुपरस्टार रजनीकांत ने सार्वजनिक रूप से उन्हें अपने पिता के समान सम्मान देने की इच्छा जताई थी।

Contents
बचपन में पिता का साया उठा, मां की सीख बनी जीवन का आधारसरकारी नौकरी मिली, लेकिन पहली तनख्वाह ने बदल दी जिंदगीसरकारी नौकरी के बावजूद होटल में क्यों करते थे काम?देश संकट में था तो सोने की चेन भी कर दी दानरिटायरमेंट की पूरी रकम भी कर दी दान30 करोड़ रुपये का पुरस्कार भी गरीबों के नामरजनीकांत भी हो गए भावुकपद्मश्री से हुआ सम्मानितमृत्यु के बाद भी समाज सेवा का संकल्पआज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा

यह कहानी केवल दान की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो बताती है कि इंसान की सबसे बड़ी पूंजी उसका बड़ा दिल होता है।

बचपन में पिता का साया उठा, मां की सीख बनी जीवन का आधार

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के एक छोटे से गांव मेलकरिवेलमकुलम में जन्मे पालम कल्याणसुंदरम ने बचपन में ही अपने पिता को खो दिया था। परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनकी मां ने बेटे को ईमानदारी, मेहनत और परोपकार का पाठ पढ़ाया।

मां अक्सर कहा करती थीं—

“बेटा, जो केवल अपने लिए जीता है, वह सिर्फ जीवन बिताता है। लेकिन जो दूसरों के लिए जीता है, वही वास्तव में अमर हो जाता है।”

यही सीख उनके जीवन का सबसे बड़ा सिद्धांत बन गई।

सरकारी नौकरी मिली, लेकिन पहली तनख्वाह ने बदल दी जिंदगी

पालम कल्याणसुंदरम पढ़ाई में बेहद मेधावी थे। उन्होंने लाइब्रेरी साइंस में गोल्ड मेडल हासिल किया और बाद में एक सरकारी कॉलेज में लाइब्रेरियन के पद पर नियुक्त हुए।

पहली तनख्वाह मिलने के बाद उन्होंने ऐसा निर्णय लिया जिसने सभी को चौंका दिया। उन्होंने घोषणा की कि वे अपनी पूरी सैलरी गरीब, अनाथ और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा और सामाजिक कार्यों में दान करेंगे।

इसके बाद उन्होंने पूरे 35 वर्षों की नौकरी के दौरान अपनी 100 प्रतिशत तनख्वाह समाज सेवा के लिए समर्पित कर दी।

सरकारी नौकरी के बावजूद होटल में क्यों करते थे काम?

सबसे बड़ा सवाल यह था कि जब वे अपनी पूरी सैलरी दान कर देते थे तो अपना खर्च कैसे चलाते थे?

इसका जवाब भी उतना ही प्रेरणादायक है।

दिन में वे सरकारी कॉलेज में लाइब्रेरियन की जिम्मेदारी निभाते थे, जबकि रात में एक स्थानीय होटल में वेटर और सफाई कर्मचारी के रूप में काम करते थे। होटल से मिलने वाली मामूली आय से वे अपना भोजन और अन्य आवश्यक खर्च पूरे करते थे।

उन्होंने कभी विलासितापूर्ण जीवन की इच्छा नहीं की। उनका मानना था कि जरूरत से ज्यादा धन किसी और की जिंदगी बदल सकता है।

देश संकट में था तो सोने की चेन भी कर दी दान

साल 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने देशवासियों से राष्ट्रीय रक्षा कोष में योगदान देने की अपील की।

उस समय युवा पालम कल्याणसुंदरम के पास कोई बड़ी संपत्ति नहीं थी। उनके पास केवल 65 ग्राम की एक सोने की चेन थी, जिसे उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के राष्ट्रीय रक्षा कोष में दान कर दिया।

यह घटना उनके देशप्रेम और त्याग की भावना को दर्शाती है।

रिटायरमेंट की पूरी रकम भी कर दी दान

साल 1998 में जब वे सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए, तब उन्हें लगभग 10 लाख रुपये पेंशन और अन्य लाभ के रूप में मिले।

लेकिन उन्होंने इस राशि को भी अपने पास नहीं रखा। पूरी रकम जरूरतमंदों और सामाजिक संस्थाओं को दान कर दी।

उनका मानना था कि समाज ने उन्हें जो कुछ दिया है, उसे समाज को लौटाना ही उनका कर्तव्य है।

30 करोड़ रुपये का पुरस्कार भी गरीबों के नाम

पालम कल्याणसुंदरम के सेवा कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। एक अमेरिकी संस्था ने उन्हें “मैन ऑफ द मिलेनियम” सम्मान से नवाजा और लगभग 30 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार दिया।

यह किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन बदल देने वाली राशि हो सकती थी, लेकिन उन्होंने इस पुरस्कार का एक भी रुपया अपने लिए नहीं रखा।

पूरी राशि गरीबों, अनाथालयों और समाजसेवी कार्यों के लिए दान कर दी।

जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने इतनी बड़ी रकम अपने लिए क्यों नहीं रखी, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा—

“मेरी जरूरतें बहुत छोटी हैं। होटल में काम करके मेरा गुजारा आराम से हो जाता है। इस दुनिया से जाते समय कोई धन साथ नहीं जाता, इसलिए इसे जरूरतमंदों के काम आना चाहिए।”

रजनीकांत भी हो गए भावुक

साल 2012 में जब सुपरस्टार रजनीकांत को पालम कल्याणसुंदरम के जीवन और सेवा कार्यों के बारे में विस्तार से पता चला तो वे गहराई से प्रभावित हुए।

उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे पालम कल्याणसुंदरम को अपने पिता के समान सम्मान देना चाहते हैं।

बताया जाता है कि रजनीकांत ने उनसे अपने साथ रहने का आग्रह भी किया, लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना करते हुए कहा—

“अभी मेरा काम पूरा नहीं हुआ है। अभी बहुत से लोगों की सेवा करनी बाकी है।”

पद्मश्री से हुआ सम्मानित

समाज सेवा और मानवता के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2023 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।

यह सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो समाज के लिए कुछ करने का सपना देखते हैं।

मृत्यु के बाद भी समाज सेवा का संकल्प

पालम कल्याणसुंदरम की सेवा भावना केवल जीवन तक सीमित नहीं है।

उन्होंने पहले ही निर्णय ले लिया है कि मृत्यु के बाद उनकी आंखें और पूरा शरीर मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए दान कर दिया जाएगा, ताकि उनकी अंतिम यात्रा भी किसी के काम आ सके।

यह निर्णय बताता है कि उनका जीवन पूरी तरह मानव सेवा को समर्पित रहा है।

आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा

आज जब समाज में सफलता को अक्सर धन और भौतिक उपलब्धियों से जोड़ा जाता है, तब पालम कल्याणसुंदरम का जीवन यह संदेश देता है कि असली सफलता दूसरों के जीवन में खुशियां लाने में है।

उन्होंने यह साबित कर दिया कि सेवा करने के लिए करोड़पति होना जरूरी नहीं, बल्कि करोड़ों जैसा बड़ा दिल होना जरूरी है।

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