रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में एक्शन; ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी, सरकारी ठेकों के पैसे और कथित फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की गहन जांच में जुटी प्रवर्तन निदेशालय की टीम
लखनऊ/रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर के पूर्व विधायक आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। जौहर यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ा एक्शन किया है। एजेंसी की लखनऊ जोनल टीम ने उत्तर प्रदेश के रामपुर और सहारनपुर के साथ-साथ दिल्ली में भी छापेमारी की कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि कुल 10 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया।
ईडी की यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत की गई है। जांच एजेंसी कथित तौर पर सरकारी ठेकों से जुड़े पैसों, वित्तीय लेन-देन, ट्रस्ट को मिले डोनेशन, यूनिवर्सिटी में कराए गए निर्माण कार्यों और संपत्तियों के निर्माण में इस्तेमाल की गई रकम की जांच कर रही है। छापेमारी के दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज, लेन-देन से जुड़े कागजात और डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है।
यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है, जब पिछले कुछ दिनों से मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी लगातार कानूनी और प्रशासनिक मामलों को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है। विश्वविद्यालय की कई इमारतों को लेकर पहले से विवाद चल रहा है और अब ईडी की कार्रवाई ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
रामपुर से दिल्ली तक 10 ठिकानों पर ED की दस्तक
जानकारी के मुताबिक, ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय की टीम ने 19 अगस्त को रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कार्रवाई का केंद्र जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से संबंधित कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, आजम खान के खिलाफ पहले से दर्ज कई मामलों की जानकारी जांच एजेंसी के साथ साझा की गई थी। इसके बाद ईडी ने उपलब्ध रिकॉर्ड और संबंधित मामलों की जांच के आधार पर कथित मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से पड़ताल शुरू की। एजेंसी अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग स्रोतों से आया पैसा कहां से आया, किन लोगों या संस्थाओं के जरिए उसका लेन-देन हुआ और आखिरकार उसका इस्तेमाल किन संपत्तियों या निर्माण कार्यों में किया गया।
ईडी की छापेमारी का मुख्य उद्देश्य कथित तौर पर ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ यानी अपराध से हासिल धन का पता लगाना है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि किसी कथित अवैध गतिविधि से प्राप्त रकम को वैध दिखाने के लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल तो नहीं किया गया।
सरकारी ठेकों से जुड़े पैसे की कथित हेराफेरी की जांच
ईडी की जांच में एक अहम पहलू सरकारी ठेकों से मिलने वाली रकम से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। आरोप है कि सरकारी ठेकों से आर्थिक लाभ प्राप्त करने वाले कुछ लोगों या ठेकेदारों के माध्यम से पैसे का कथित रूप से डायवर्जन किया गया और बाद में उस रकम का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी तथा उससे जुड़े ट्रस्ट के लिए संपत्तियां बनाने या अन्य कार्यों में किया गया।
जांच एजेंसी अब इस पूरे वित्तीय नेटवर्क को समझने की कोशिश कर रही है। ईडी के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं—सरकारी ठेकों से जुड़े पैसे का वास्तविक स्रोत क्या था, वह रकम किन खातों या व्यक्तियों के माध्यम से आगे बढ़ी और क्या उसका कोई हिस्सा ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी तक पहुंचा?
जांच के दौरान कुछ ऐसे वित्तीय ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलने की बात सामने आई है, जिनमें सरकारी कामों से जुड़े ठेकेदारों और जौहर ट्रस्ट के बीच पैसों के लेन-देन की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सरकारी ठेकों से आर्थिक फायदा उठाने वाले कुछ लोगों ने कथित तौर पर उस रकम का एक हिस्सा डोनेशन या अन्य माध्यमों से ट्रस्ट अथवा यूनिवर्सिटी तक पहुंचाया।
हालांकि, इन आरोपों और वित्तीय लेन-देन की अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल ईडी इस मामले में दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर अपनी जांच आगे बढ़ा रही है।
सिर्फ बैंक खातों तक सीमित नहीं है जांच
ईडी की जांच केवल बैंक खातों में पैसे के ट्रांसफर तक सीमित नहीं है। एजेंसी यूनिवर्सिटी में कराए गए निर्माण कार्यों, इमारतों पर खर्च की गई रकम, बड़े डोनेशन और संपत्तियों के विकास से जुड़े वित्तीय स्रोतों की भी पड़ताल कर रही है।
जांच एजेंसी के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट से जुड़ी अलग-अलग परियोजनाओं के लिए धन कहां से आया और निर्माण कार्यों में इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत क्या था। इसी वजह से सर्च ऑपरेशन के दौरान बैंकिंग रिकॉर्ड के अलावा ठेके, बिल, भुगतान संबंधी दस्तावेज, संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल डाटा भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
ईडी की टीम कथित तौर पर यह भी देख रही है कि किसी रकम को कई चरणों में अलग-अलग लोगों, कंपनियों या संस्थाओं के जरिए भेजा गया या नहीं। यदि ऐसा हुआ है तो एजेंसी उस पूरी धनराशि के रास्ते को ट्रैक करने का प्रयास करेगी।
वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों पर ED की नजर
छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आगे की जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ईडी की टीम बैंकिंग रिकॉर्ड, अकाउंट स्टेटमेंट, वित्तीय दस्तावेज, लेन-देन से जुड़े कागजात और डिजिटल डिवाइस की जांच कर रही है।
डिजिटल सबूतों में कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, स्टोरेज डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसी इनसे ईमेल, डिजिटल ट्रांजैक्शन, भुगतान संबंधी जानकारी और अन्य वित्तीय कड़ियों का पता लगाने का प्रयास कर सकती है।
ईडी यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि सरकारी ठेकों से कथित तौर पर डायवर्ट की गई रकम कितनी थी। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि पैसा किन-किन लोगों और संस्थाओं के माध्यम से गुजरा और अंत में उसका इस्तेमाल कहां किया गया।
जांच में यदि किसी नए व्यक्ति, संस्था या कंपनी की भूमिका सामने आती है तो एजेंसी आगे उनसे भी पूछताछ कर सकती है। फिलहाल छापेमारी के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।
38 इमारतों को लेकर पहले से कानूनी विवाद
जौहर यूनिवर्सिटी पिछले कुछ दिनों से कई कानूनी मामलों के कारण चर्चा में है। कथित अनियमितताओं को लेकर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को गिराए जाने का खतरा भी सामने आया था। रामपुर विकास प्राधिकरण यानी RDA ने इन इमारतों के संबंध में कार्रवाई का आदेश दिया था।
हालांकि, इस मामले में विश्वविद्यालय को अंतरिम राहत मिली है। मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट ने रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके चलते फिलहाल इमारतों को गिराने की कार्रवाई पर रोक है। इस मामले में अगली कानूनी सुनवाई 25 अगस्त को होनी है।
यूनिवर्सिटी से जुड़े भवनों पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तथा अब मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की छापेमारी ने जौहर यूनिवर्सिटी को एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में ला दिया है।
17 जून से लगातार अलग-अलग विभागों की कार्रवाई
जौहर यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को पिछले कुछ समय में कई विभागों की ओर से नोटिस मिल चुके हैं। बताया गया है कि 17 जून को आयकर विभाग की ओर से ‘कारण बताओ नोटिस’ मिलने के बाद विश्वविद्यालय और ट्रस्ट से जुड़े मामलों में अन्य एजेंसियों की कार्रवाई भी सामने आई।
इसके बाद रामपुर विकास प्राधिकरण, फायर विभाग, लोक निर्माण विभाग और जल निगम जैसे विभागों की ओर से भी नोटिस और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई। इससे यूनिवर्सिटी पर प्रशासनिक और कानूनी दबाव लगातार बढ़ता गया।
जानकारी के अनुसार, 17 जून के नोटिस के बाद 23 जून को आयकर विभाग ने एक और नोटिस जारी किया। इसमें यूनिवर्सिटी चलाने वाले मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन को कथित नियम उल्लंघनों के आधार पर रद्द करने की कार्रवाई की बात सामने आई। साथ ही ट्रस्ट की कानूनी स्थिति को लेकर भी निर्देश जारी किए गए।
इन अलग-अलग कार्रवाइयों के बीच अब ईडी की एंट्री ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।
क्या आगे और बढ़ेगा ED का शिकंजा?
फिलहाल ईडी की छापेमारी जांच का एक हिस्सा है और इससे किसी मामले में दोष सिद्ध होना स्वतः साबित नहीं होता। जांच एजेंसी सर्च ऑपरेशन के दौरान मिले दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करेगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई, पूछताछ, समन या अन्य कानूनी कदमों पर निर्णय लिया जा सकता है।
जांच का सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी ठेकों से जुड़े कथित पैसों का पूरा नेटवर्क क्या था और क्या वास्तव में उस धनराशि का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी या उससे जुड़े ट्रस्ट के लिए किया गया। यदि जांच में किसी बड़े वित्तीय नेटवर्क, अतिरिक्त लोगों या संस्थाओं की भूमिका सामने आती है तो आने वाले दिनों में मामले में और नए खुलासे हो सकते हैं।
आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है। एक तरफ विश्वविद्यालय की इमारतों को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है, वहीं दूसरी तरफ ईडी अब कथित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन के एंगल से जांच कर रही है।
फिलहाल, रामपुर से लेकर दिल्ली तक हुई 10 ठिकानों पर छापेमारी ने यह साफ कर दिया है कि जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े वित्तीय मामलों की जांच अब बेहद गंभीर चरण में पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में सर्च ऑपरेशन से मिले दस्तावेज और डिजिटल सबूत इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकते हैं।
