Bombay High Court Clerk Exam Controversy: महाराष्ट्र में बॉम्बे हाईकोर्ट क्लर्क भर्ती परीक्षा को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। ऑनलाइन टाइपिंग टेस्ट में कथित तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं। उम्मीदवारों का आरोप है कि परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद कई कंप्यूटर सिस्टम, माउस और की-बोर्ड ने काम करना बंद कर दिया, जबकि कुछ अभ्यर्थियों के सिस्टम अपने आप लॉगआउट हो गए। इसके बाद उन्हें परीक्षा पूरी करने का अवसर दिए बिना ही फेल घोषित कर दिया गया। अब नाराज अभ्यर्थी परीक्षा दोबारा कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
परीक्षा शुरू होते ही सामने आने लगीं तकनीकी दिक्कतें
अभ्यर्थियों के मुताबिक, जैसे ही उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट क्लर्क भर्ती के टाइपिंग टेस्ट के लिए कंप्यूटर पर बैठकर परीक्षा शुरू की, कई सेंटरों पर तकनीकी समस्याएं सामने आने लगीं। किसी उम्मीदवार का माउस काम नहीं कर रहा था, तो किसी के की-बोर्ड में परेशानी आ रही थी। कुछ अभ्यर्थियों ने यह भी दावा किया कि परीक्षा शुरू होने के करीब 10 मिनट के भीतर ही उनके सिस्टम लॉगआउट हो गए।
उम्मीदवारों का कहना है कि टाइपिंग टेस्ट में सबसे महत्वपूर्ण चीज कंप्यूटर और की-बोर्ड ही होते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा के दौरान यही उपकरण ठीक से काम न करें तो अभ्यर्थी अपनी वास्तविक क्षमता का प्रदर्शन कैसे कर सकते हैं? उनका आरोप है कि तकनीकी खराबी के कारण उन्हें परीक्षा पूरी करने का मौका नहीं मिला और बाद में उन्हें फेल कर दिया गया।
‘ये हमारी गलती नहीं, सिस्टम की गलती है’
परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें बिना उनकी गलती के परीक्षा से बाहर कर दिया गया। उनका तर्क है कि अगर किसी उम्मीदवार का की-बोर्ड या माउस काम नहीं कर रहा है अथवा सर्वर की वजह से सिस्टम लॉगआउट हो रहा है, तो इसके लिए अभ्यर्थी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
छात्रों का आरोप है कि जब उन्होंने परीक्षा के दौरान तकनीकी समस्याओं को लेकर शिकायत की तो उन्हें उचित समाधान नहीं मिला। कुछ अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर अधिकारियों की ओर से उनके साथ कथित तौर पर उचित व्यवहार नहीं किया गया। इससे उम्मीदवारों में नाराजगी और बढ़ गई।
अच्छे कंप्यूटर और जरूरी तकनीकी इंतजाम नहीं होने का आरोप
अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्रों पर उपलब्ध कराए गए कंप्यूटर सिस्टम की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई जगह पर्याप्त रूप से काम करने वाले कंप्यूटर उपलब्ध नहीं थे और कुछ की-बोर्ड पहले से ही ठीक स्थिति में नहीं थे।
उम्मीदवारों का कहना है कि भर्ती परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए परीक्षा केंद्रों पर पहले से सभी कंप्यूटर, की-बोर्ड, माउस, सर्वर और इंटरनेट कनेक्टिविटी की जांच होनी चाहिए थी। अगर मॉक टेस्ट या तकनीकी परीक्षण के दौरान इन खामियों को दूर कर लिया जाता तो परीक्षा के समय अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
री-एग्जाम की मांग पर अड़े अभ्यर्थी
तकनीकी गड़बड़ियों से नाराज अभ्यर्थियों ने अब दोबारा परीक्षा कराने की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि जिस परीक्षा में बड़ी संख्या में उम्मीदवार तकनीकी समस्याओं के कारण अपना टेस्ट पूरा नहीं कर पाए, उसके परिणाम को निष्पक्ष नहीं माना जा सकता।
अभ्यर्थियों की मांग है कि प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा टाइपिंग टेस्ट कराया जाए। उनका कहना है कि री-एग्जाम होने से उन छात्रों को अपनी वास्तविक क्षमता साबित करने का मौका मिलेगा, जिन्हें सिस्टम की तकनीकी खराबी के कारण परीक्षा पूरी करने का अवसर नहीं मिल सका।
डोंबिवली सेंटर पर जारी रहा प्रदर्शन
इस पूरे विवाद के बीच डोंबिवली सेंटर पर अभ्यर्थियों के प्रदर्शन की बात भी सामने आई है। छात्र परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा आयोजित करने की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को समझाने की कोशिश की, लेकिन अभ्यर्थी अपनी मांग पर कायम रहे।
छात्रों का कहना है कि उन्होंने भर्ती परीक्षा की तैयारी लंबे समय तक की है। ऐसे में केवल परीक्षा केंद्र की तकनीकी खामी के कारण उनका भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि अगर सिस्टम में खराबी थी तो परीक्षा केंद्र पर ही समस्या का समाधान किया जाना चाहिए था या प्रभावित अभ्यर्थियों को अतिरिक्त समय और दोबारा परीक्षा का विकल्प दिया जाना चाहिए था।
अभिजीत दीपके ने भी उठाई आवाज
मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके के जुड़ने के बाद विवाद और चर्चा में आ गया है। दीपके ने इसे प्रशासनिक और तकनीकी विफलता बताते हुए अभ्यर्थियों के समर्थन में आवाज उठाई है। उनका आरोप है कि महाराष्ट्र में हाईकोर्ट की ऑनलाइन परीक्षा के दौरान कई जगह अव्यवस्था की स्थिति बनी और सर्वर तथा कंप्यूटर से जुड़ी समस्याओं के कारण अभ्यर्थियों को परेशानी हुई।
उन्होंने दोबारा परीक्षा कराने की मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि जब तक छात्रों की मांग पर समाधान नहीं होता, तब तक वह उनके साथ खड़े रहेंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या फिर से होगी परीक्षा?
बॉम्बे हाईकोर्ट क्लर्क भर्ती परीक्षा को लेकर सामने आया विवाद अब सिर्फ तकनीकी समस्या तक सीमित नहीं रह गया है। अभ्यर्थियों के लिए यह उनके करियर और भविष्य से जुड़ा मामला है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या परीक्षा प्राधिकरण अभ्यर्थियों की शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराएगा और तकनीकी खामियों से प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा का आयोजन करेगा?
अगर जांच में यह सामने आता है कि वास्तव में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को कंप्यूटर, की-बोर्ड, माउस, सर्वर या लॉगआउट जैसी तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा, तो प्रभावित उम्मीदवारों को राहत देने की मांग और मजबूत हो सकती है।
फिलहाल अभ्यर्थी अपने प्रदर्शन और री-एग्जाम की मांग को लेकर डटे हुए हैं। दूसरी ओर, परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने ऑनलाइन भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी तैयारी, सेंटर की निगरानी और अभ्यर्थियों की शिकायतों के त्वरित समाधान की जरूरत को भी सामने ला दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि संबंधित प्राधिकरण इस पूरे विवाद पर क्या कदम उठाता है और प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर क्या फैसला लिया जाता है।
