नई दिल्ली। देश में E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर बहस अब सड़क से लेकर राजनीति के केंद्र तक पहुंच गई है। शनिवार, 1 अगस्त को इस मुद्दे पर राजधानी दिल्ली में दो बड़े कार्यक्रम होने जा रहे हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक ओर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल E20 फ्यूल के खिलाफ नेशनल टाउनहॉल आयोजित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला इस नीति के विरोध में मौन मार्च और भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान कर चुके हैं।
इन दोनों कार्यक्रमों के चलते E20 फ्यूल का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। विरोध करने वालों का कहना है कि इस नीति का आम जनता, वाहन चालकों और पर्यावरण पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है, जबकि सरकार का दावा है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन देश की ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा की बचत और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
साढ़े 11 बजे से शुरू होगा नेशनल टाउनहॉल
अरविंद केजरीवाल का ‘E20 के खिलाफ नेशनल टाउनहॉल’ दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सुबह 11:30 बजे आयोजित किया जाएगा। आम आदमी पार्टी के अनुसार इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, वाहन मालिक, परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोग, पर्यावरणविद और आम नागरिक अपनी राय रखेंगे।
केजरीवाल का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि लोगों की चिंताओं को सामने लाने का मंच है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से देशभर के नागरिकों से इस चर्चा में भाग लेने की अपील की है। जो लोग दिल्ली नहीं पहुंच सकते, उनके लिए ऑनलाइन जुड़ने की भी व्यवस्था की गई है।
‘देश की एक बड़ी हस्ती भी होगी शामिल’
कार्यक्रम से एक दिन पहले अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दावा किया कि इस नेशनल टाउनहॉल में देश की एक प्रमुख और चर्चित हस्ती भी शामिल होगी, जो लोगों की समस्याओं को सुनेगी और E20 फ्यूल पर अपनी राय रखेगी। हालांकि उन्होंने उस व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया।
इस घोषणा के बाद कार्यक्रम को लेकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई है। माना जा रहा है कि टाउनहॉल के दौरान E20 नीति से जुड़े कई तकनीकी और सामाजिक पहलुओं पर खुलकर चर्चा होगी।
तहसीन पूनावाला की भूख हड़ताल और मौन मार्च
दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने भी आज से E20 फ्यूल के विरोध में मौन मार्च और भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि उन्हें मौन व्रत और भूख हड़ताल करने से रोकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने लिखा कि उन्हें कहा गया है कि वे न तो मौन व्रत रख सकते हैं और न ही भूख हड़ताल कर सकते हैं।
पूनावाला ने अपने संदेश में लिखा कि, “कोई कानून नहीं, कोई लिखित आदेश नहीं, लेकिन मुझे रोका जा रहा है। देखते हैं आज मुझे रोकने के लिए कितने पुलिसकर्मी भेजे जाते हैं। मेरी खामोशी ज्यादा जोरदार होगी।”
उनके इस बयान के बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
क्या है E20 फ्यूल?
E20 फ्यूल ऐसा पेट्रोल है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। सरकार का उद्देश्य पेट्रोल पर निर्भरता कम करना, कच्चे तेल के आयात में कमी लाना, किसानों को गन्ने और अन्य फसलों से बनने वाले इथेनॉल का बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा कार्बन उत्सर्जन कम करना है।
सरकार का कहना है कि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। कई वाहन निर्माता कंपनियां भी E20 अनुकूल इंजन विकसित कर रही हैं।
विरोध करने वालों की क्या हैं चिंताएं?
E20 नीति का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि सभी वाहन अभी E20 ईंधन के अनुरूप नहीं हैं। उनका दावा है कि पुराने वाहनों के इंजन पर इसका असर पड़ सकता है और वाहन मालिकों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि वाहन E20 के अनुरूप नहीं हैं तो उनकी माइलेज, इंजन की कार्यक्षमता और रखरखाव की लागत प्रभावित हो सकती है। हालांकि इन दावों पर अलग-अलग विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है और इस विषय पर तकनीकी अध्ययन भी जारी हैं।
ऑनलाइन भी जुड़ सकेंगे लोग
आम आदमी पार्टी ने जानकारी दी है कि देशभर के लोग इस टाउनहॉल में डिजिटल माध्यम से भी भाग ले सकते हैं। इसके लिए पार्टी की ओर से एक व्हाट्सएप नंबर जारी किया गया है, जिसके माध्यम से लोग अपनी राय, सुझाव और सवाल साझा कर सकते हैं।
पार्टी का दावा है कि हजारों लोग इस अभियान से जुड़ेंगे और E20 नीति पर व्यापक जनमत तैयार किया जाएगा।
राजनीतिक बहस तेज होने के आसार
विश्लेषकों का मानना है कि E20 फ्यूल का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है। जहां विपक्ष इस नीति के संभावित प्रभावों पर सवाल उठा रहा है, वहीं केंद्र सरकार इसे ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित ईंधन की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
आज होने वाले नेशनल टाउनहॉल और तहसीन पूनावाला की भूख हड़ताल के बाद इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।
