हरिद्वार: उत्तराखंड में इन दिनों जहां कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है, वहीं दूसरी ओर वर्ष 2027 में होने वाले हरिद्वार महाकुंभ की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से जुड़े मतभेदों के बीच भी विभिन्न अखाड़ों ने कुंभ की धार्मिक तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा ने आगामी हरिद्वार कुंभ मेले के प्रमुख धार्मिक आयोजनों का आधिकारिक पंचांग जारी कर दिया है। इस घोषणा के साथ ही कुंभ मेले की धार्मिक गतिविधियों का विस्तृत कार्यक्रम भी सामने आ गया है, जिससे देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं और संत समाज में उत्साह का माहौल है।
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने बताया कि पंचांग विद्वान ज्योतिषाचार्यों, संत-महात्माओं और अखाड़े के वरिष्ठ पदाधिकारियों से विस्तृत विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें नगर प्रवेश से लेकर भूमि पूजन, धर्म ध्वजा स्थापना, पेशवाई और तीनों अमृत स्नान (शाही स्नान) की तिथियां एवं शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं।
21 नवंबर 2026 से शुरू होंगी धार्मिक गतिविधियां
जूना अखाड़े के अनुसार 21 नवंबर 2026 को गोधूलि बेला में पंच परमेश्वर, रमता पंच और साधु-संतों की जमात का भव्य नगर प्रवेश होगा। यह आयोजन कुंभ मेले की प्रारंभिक धार्मिक गतिविधियों की शुरुआत मानी जाएगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नागा संन्यासी, महंत और देशभर से आने वाले संत हरिद्वार पहुंचेंगे।
नगर प्रवेश के साथ ही हरिद्वार में कुंभ की आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बनने लगेगा और अखाड़ों की गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो जाएंगी।
1 दिसंबर को होगा भूमि पूजन
घोषित कार्यक्रम के अनुसार 1 दिसंबर 2026 को भैरव अष्टमी के पावन अवसर पर अभिजीत मुहूर्त में भूमि पूजन किया जाएगा। दोपहर 11:46 बजे से 12:26 बजे तक निर्धारित शुभ मुहूर्त में यह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होगा।
भूमि पूजन के बाद अखाड़े को आवंटित क्षेत्र में धार्मिक शिविरों, संत निवास, यज्ञशालाओं और अन्य व्यवस्थाओं का कार्य शुरू होगा।
23 दिसंबर को धर्म ध्वजा स्थापना के साथ होगा धार्मिक शुभारंभ
कुंभ मेले की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक धर्म ध्वजा स्थापना का आयोजन 23 दिसंबर 2026 को भगवान दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर किया जाएगा।
अभिजीत मुहूर्त 11:56 बजे से 12:36 बजे के बीच धर्म ध्वजा स्थापित की जाएगी। इसी धार्मिक अनुष्ठान के साथ कुंभ मेले का आध्यात्मिक और पारंपरिक रूप से विधिवत शुभारंभ माना जाएगा।
धर्म ध्वजा केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सनातन परंपरा, अखाड़ों की गौरवशाली विरासत और कुंभ महापर्व के शुभारंभ का प्रतीक भी मानी जाती है।
14 जनवरी 2027 को निकलेगी भव्य पेशवाई
जूना अखाड़े ने घोषणा की है कि 14 जनवरी 2027 को उत्तरायण पर्व के अवसर पर भव्य पेशवाई निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा कुंभ मेले का सबसे आकर्षक और ऐतिहासिक आयोजन मानी जाती है।
पेशवाई में भगवान दत्तात्रेय की पालकी, अखाड़े के निशान, पारंपरिक ध्वज, नगाड़े, घोड़े, हाथी और हजारों नागा संन्यासी शामिल होंगे। देशभर से आए साधु-संत इस भव्य शोभायात्रा में हिस्सा लेकर हरिद्वार की सड़कों पर सनातन संस्कृति की अद्भुत छटा बिखेरेंगे।
इस आयोजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से 12:46 बजे निर्धारित किया गया है।
तीन अमृत (शाही) स्नान की तिथियां घोषित
जूना अखाड़े ने कुंभ मेले के तीनों प्रमुख अमृत स्नानों की तिथियों की भी घोषणा कर दी है।
- प्रथम अमृत स्नान – 6 मार्च 2027 (महाशिवरात्रि)
- द्वितीय अमृत स्नान – 8 मार्च 2027 (सोमवती अमावस्या)
- तृतीय अमृत स्नान – 14 अप्रैल 2027 (मेष संक्रांति)
इन तीनों अवसरों पर जूना अखाड़ा अपने सहयोगी अखाड़ों के साथ पारंपरिक शाही स्नान करेगा। माना जाता है कि इन पावन तिथियों पर गंगा में स्नान करने से विशेष आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है।
अग्नि और आह्वान अखाड़ा भी रहेगा साथ
श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने बताया कि हर बार की तरह इस बार भी जूना अखाड़ा अपने सहयोगी अग्नि अखाड़ा और आह्वान अखाड़ा के साथ अमृत स्नान करेगा। इसके अलावा छोटे अखाड़ों से जुड़े साधु-संतों को भी साथ लेकर चलने की परंपरा का पालन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जहां भी मेला प्रशासन भूमि आवंटित करेगा, वहीं विधिवत भूमि पूजन कर सभी धार्मिक गतिविधियां शुरू कर दी जाएंगी।
दिव्य और भव्य कुंभ की उम्मीद
श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में वर्ष 2027 का हरिद्वार कुंभ दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित होगा। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला प्रशासन लगातार अखाड़ों के साथ समन्वय बनाकर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रहा है।
उनके अनुसार सरकार और अखाड़ों के बीच बेहतर तालमेल के चलते श्रद्धालुओं को इस बार पहले से अधिक सुविधाएं मिलेंगी। सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और आवास जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजन की ओर बढ़ते कदम
हरिद्वार कुंभ केवल एक धार्मिक मेला नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक परंपरा का सबसे विशाल उत्सव है। देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु, संत, महात्मा और पर्यटक इस महापर्व में भाग लेने हरिद्वार पहुंचते हैं।
जूना अखाड़े द्वारा पंचांग जारी किए जाने के साथ अब वर्ष 2027 के कुंभ मेले की धार्मिक तैयारियों ने औपचारिक रूप से गति पकड़ ली है। आने वाले महीनों में अन्य अखाड़ों द्वारा भी अपने धार्मिक कार्यक्रम घोषित किए जाने की संभावना है।
अब श्रद्धालुओं की नजरें कुंभ मेले की तैयारियों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और आगामी धार्मिक आयोजनों पर टिकी हैं। यदि सभी तैयारियां निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो हरिद्वार महाकुंभ 2027 एक बार फिर भारत की आध्यात्मिक विरासत, सनातन संस्कृति और धार्मिक आस्था का भव्य वैश्विक उत्सव बनकर दुनिया के सामने अपनी अनूठी पहचान स्थापित करेगा।
