गोरखपुर: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ एक अलग ही आध्यात्मिक स्वरूप में नजर आए। गोरखनाथ मंदिर में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान उन्होंने एक साथ गुरु और शिष्य दोनों की भूमिका निभाई। एक ओर उन्होंने नाथपंथ के आदिगुरु महायोगी गुरु गोरखनाथ और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, वहीं दूसरी ओर गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में अपने शिष्यों और अनुयायियों को आशीर्वाद भी दिया।
गुरु पूर्णिमा का पर्व नाथ संप्रदाय और गोरक्षपीठ के लिए विशेष महत्व रखता है। सदियों से चली आ रही गुरु-शिष्य परंपरा इस दिन गोरखनाथ मंदिर में जीवंत दिखाई देती है। गोरक्षपीठ की मान्यता के अनुसार गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं, बल्कि ईश्वर तक पहुंचने का माध्यम होते हैं। इसी परंपरा को निभाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु गोरखनाथ का विशेष पूजन किया और नाथ योगियों की परंपरा को नमन किया।
गुरु गोरखनाथ को अर्पित किया रोट, शिष्यों को दिया आशीर्वाद
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में तीन दिवसीय विशेष आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुबह मंदिर पहुंचकर सबसे पहले गुरु गोरखनाथ की पूजा की। उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठान में भाग लिया और गुरु गोरक्षनाथ को विशेष रूप से रोट अर्पित किया।
इसके बाद उन्होंने नाथपंथ के सभी योगियों की समाधि स्थलों और मंदिर परिसर में स्थित देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की। धार्मिक अनुष्ठानों के पूर्ण होने के बाद योगी आदित्यनाथ अपने शिष्यों और अनुयायियों के बीच पहुंचे। उन्होंने सभी को तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया और गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को बनाए रखा।
इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में सहभोज का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और अनुयायियों ने हिस्सा लिया। साथ ही मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा का भी समापन हुआ।
गोरक्षपीठ और गुरु पूर्णिमा का है गहरा संबंध
गोरक्षपीठ यानी गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा का आयोजन नाथ संप्रदाय के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। इस पीठ की पहचान ही गुरु परंपरा से जुड़ी हुई है। महायोगी गुरु गोरखनाथ से शुरू हुई यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और वर्तमान में गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ इसे आगे बढ़ा रहे हैं।
गोरक्षपीठ ने हमेशा योग, शिक्षा, चिकित्सा और समाज सेवा के माध्यम से लोक कल्याण का संदेश दिया है। महायोगी गुरु गोरखनाथ और उनके बाद पीठ के प्रमुख संतों ने समाज को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देने के साथ-साथ जनसेवा को भी प्राथमिकता दी।
महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ की विरासत को आगे बढ़ा रहे योगी
गोरक्षपीठ के विकास में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने वर्ष 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी। शिक्षा के क्षेत्र में यह संस्था आज एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित हो चुकी है।
महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने गोरखपुर में शिक्षा के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए और गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में भी योगदान दिया। उन्होंने अपने दो महाविद्यालय तक विश्वविद्यालय के लिए दान कर दिए थे।
उनके बाद ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में गोरक्षपीठ की भूमिका को और मजबूत किया।
आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने गुरु महंत अवेद्यनाथ की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके नेतृत्व में गोरक्षपीठ से जुड़े शिक्षा संस्थान, चिकित्सालय और सामाजिक सेवा के कार्य लगातार विस्तार कर रहे हैं।
आध्यात्म और सेवा का संगम है गोरक्षपीठ
गोरक्षपीठ की विशेषता यह है कि यहां आध्यात्मिक परंपरा के साथ-साथ समाज सेवा को भी समान महत्व दिया जाता है। गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय आज पूर्वांचल के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र के रूप में जाना जाता है।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह गुरु के प्रति श्रद्धा और शिष्यों के प्रति जिम्मेदारी निभाई, वह गोरक्षपीठ की सदियों पुरानी परंपरा की झलक दिखाता है। गुरु की भक्ति, समाज सेवा और शिष्य परंपरा का यह संगम गोरखनाथ मंदिर की पहचान को और मजबूत करता है।
गुरु पूर्णिमा के इस आयोजन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों रूप देखने को मिला, जहां उन्होंने गुरु परंपरा को नमन करते हुए अपने अनुयायियों को सेवा और संस्कार का संदेश दिया।
