देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और फर्जीवाड़े से मुक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मोदी सरकार ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ लाने की तैयारी में है, जिसके तहत जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन तय समय सीमा के बाद कराने वालों के लिए नियम पहले से कहीं अधिक सख्त हो जाएंगे।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि यदि किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु का पंजीकरण दो वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो अब केवल प्रशासनिक अधिकारी की मंजूरी पर्याप्त नहीं होगी। ऐसे मामलों में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) का आदेश अनिवार्य होगा। यानी अब अत्यधिक देरी से रजिस्ट्रेशन कराने वालों को अदालत की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य आम नागरिकों को परेशान करना नहीं, बल्कि फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों पर रोक लगाना तथा देश की नागरिक पंजीकरण प्रणाली को और अधिक मजबूत एवं विश्वसनीय बनाना है।
क्या है नया संशोधन विधेयक?
केंद्र सरकार द्वारा तैयार जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद सदस्यों के बीच वितरित किया जा चुका है और इसे जल्द संसद में पेश किए जाने की संभावना है।
सरकार का मानना है कि समय पर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण न केवल प्रत्येक नागरिक का कानूनी अधिकार है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी योजनाओं, जनगणना, सामाजिक सुरक्षा और राष्ट्रीय डेटाबेस की सटीकता के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए देर से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाया जा रहा है।
अब दो हिस्सों में बंटेगी देरी से होने वाली रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
प्रस्तावित कानून के अनुसार देर से होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण को दो अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
1. एक से दो वर्ष के भीतर देरी
यदि जन्म या मृत्यु की घटना के बाद एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर पंजीकरण कराया जाता है, तो वर्तमान व्यवस्था जारी रहेगी।
ऐसे मामलों में संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) से अनुमति लेनी होगी।
यानी इस श्रेणी में प्रशासनिक स्तर पर ही मंजूरी दी जाएगी।
2. दो वर्ष से अधिक की देरी
यहीं सबसे बड़ा बदलाव किया गया है।
यदि जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन दो वर्ष से अधिक देर से कराया जाता है तो अब किसी प्रशासनिक अधिकारी के आदेश से काम नहीं चलेगा।
ऐसे मामलों में आवेदक को प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करना होगा और अदालत से आदेश मिलने के बाद ही रजिस्ट्रेशन संभव होगा।
इस बदलाव से अत्यधिक देरी वाले मामलों में न्यायपालिका की निगरानी सुनिश्चित होगी।
क्यों उठाया गया यह कदम?
सरकार का मानना है कि कई मामलों में वर्षों बाद जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की कोशिश की जाती है, जिससे फर्जी दस्तावेज तैयार होने की आशंका बढ़ जाती है।
ऐसे प्रमाण पत्रों का उपयोग कई बार—
- फर्जी पहचान बनाने,
- सरकारी योजनाओं का गलत लाभ लेने,
- संपत्ति विवादों में,
- उत्तराधिकार के मामलों में,
- बैंकिंग प्रक्रियाओं में,
- बीमा दावों में,
- तथा अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में किया जा सकता है।
इसी संभावना को खत्म करने के लिए अब दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों की जांच अदालत की निगरानी में होगी।
वेरिफिकेशन होगा अनिवार्य
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार केवल आवेदन देना ही पर्याप्त नहीं होगा।
जिस अधिकारी को देर से रजिस्ट्रेशन की अनुमति देने का अधिकार होगा, वह पहले संबंधित जन्म या मृत्यु की सत्यता की पूरी जांच करेगा।
इसके बाद ही मंजूरी दी जाएगी।
यानी अब केवल दस्तावेज जमा कर देने से प्रमाण पत्र जारी नहीं होगा।
देनी होगी निर्धारित फीस
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देर से पंजीकरण कराने वाले आवेदकों को एक निर्धारित शुल्क भी देना होगा।
हालांकि इस शुल्क की राशि अभी तय नहीं की गई है।
सरकार बाद में नियम बनाकर इसकी घोषणा करेगी।
जन्म प्रमाण पत्र क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
भारत में जन्म प्रमाण पत्र किसी भी व्यक्ति का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहचान दस्तावेज माना जाता है।
इसके बिना कई महत्वपूर्ण कार्य संभव नहीं हो पाते।
जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता—
- स्कूल में प्रवेश
- आधार कार्ड बनवाने
- पासपोर्ट
- ड्राइविंग लाइसेंस
- सरकारी नौकरी
- मतदाता सूची में नाम
- विवाह पंजीकरण
- बैंकिंग प्रक्रिया
- सरकारी योजनाओं का लाभ
- उत्तराधिकार संबंधी दावे
जैसे अनेक कार्यों में पड़ती है।
मृत्यु प्रमाण पत्र भी उतना ही जरूरी
किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज होता है।
इसकी जरूरत होती है—
- संपत्ति हस्तांतरण
- उत्तराधिकार
- पेंशन बंद कराने
- बीमा क्लेम
- बैंक खाते बंद कराने
- सरकारी रिकॉर्ड अपडेट कराने
- कानूनी विवादों के निपटारे
जैसी प्रक्रियाओं में।
इसी कारण सरकार चाहती है कि जन्म और मृत्यु दोनों का रिकॉर्ड पूरी तरह सटीक और प्रमाणिक हो।
2023 में भी हुआ था बड़ा बदलाव
यह पहला अवसर नहीं है जब जन्म और मृत्यु पंजीकरण कानून में संशोधन किया जा रहा है।
वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने इस कानून में बड़ा परिवर्तन किया था।
उस समय जन्म प्रमाण पत्र को कई सरकारी कार्यों के लिए एकल पहचान दस्तावेज (Single Document) का दर्जा दिया गया था।
इसके बाद जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग—
- स्कूल कॉलेज में प्रवेश,
- ड्राइविंग लाइसेंस,
- मतदाता सूची,
- सरकारी नौकरी,
- विवाह पंजीकरण,
- विभिन्न सरकारी डेटाबेस
के लिए किया जाने लगा।
अब 2026 के संशोधन का उद्देश्य उसी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है।
फर्जी प्रमाण पत्रों पर लगेगी रोक
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद करेगा।
कई मामलों में वर्षों बाद गलत जानकारी देकर प्रमाण पत्र बनवा लिए जाते हैं।
अब ऐसे मामलों में न्यायिक जांच होने से गलत दस्तावेज बनाना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो जाएगा।
ईमानदार नागरिकों को नहीं होगी परेशानी
सरकार का कहना है कि यह संशोधन आम लोगों को परेशान करने के लिए नहीं है।
यदि किसी व्यक्ति के पास वास्तव में देर से पंजीकरण कराने का उचित कारण है, तो उसके लिए कानूनी रास्ता खुला रहेगा।
उसे केवल अदालत के समक्ष पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।
इससे वास्तविक मामलों में न्याय मिलेगा और फर्जी मामलों पर रोक लगेगी।
विशेषज्ञों की क्या है राय?
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और संवैधानिक विशेषज्ञ सत्य प्रकाश सिंह के अनुसार दो वर्ष से अधिक की देरी वाले मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य होने से जांच का स्तर काफी मजबूत हो जाएगा।
उनका कहना है कि जिन मामलों में फर्जीवाड़े की संभावना अधिक होती है, वहां अदालत की निगरानी व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक आवेदकों के अधिकारों पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।
यदि उनके पास उचित कारण और प्रमाण होंगे तो अदालत उन्हें राहत प्रदान कर सकेगी।
देश की नागरिक पंजीकरण प्रणाली होगी मजबूत
सरकार का मानना है कि यह संशोधन केवल कानून बदलने तक सीमित नहीं रहेगा।
इसका सीधा प्रभाव देश की नागरिक पंजीकरण प्रणाली (Civil Registration System) पर पड़ेगा।
समय पर जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड उपलब्ध होने से—
- जनसंख्या संबंधी आंकड़े अधिक सटीक होंगे।
- सरकारी योजनाओं की बेहतर योजना बन सकेगी।
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का सही लाभ मिलेगा।
- फर्जी पहचान पर रोक लगेगी।
- राष्ट्रीय डेटाबेस अधिक विश्वसनीय बनेगा।
- प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
आम लोगों के लिए क्या संदेश?
विशेषज्ञों का मानना है कि अब लोगों को जन्म और मृत्यु का पंजीकरण निर्धारित समय सीमा के भीतर ही कराना चाहिए।
यदि समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया तो बाद में कानूनी प्रक्रिया अधिक लंबी और जटिल हो सकती है।
विशेषकर दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर अदालत से आदेश लेना अनिवार्य होगा, जिससे समय और प्रक्रिया दोनों बढ़ सकते हैं।
