NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में उठे विवाद और राजनीतिक घटनाक्रम के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए देश के युवाओं के नाम एक भावुक खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने अपने चार दशक लंबे शैक्षिक जीवन, शिक्षा सुधारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता, NEET परीक्षा विवाद के दौरान उठाए गए सरकारी कदमों और अंततः अपने इस्तीफे के पीछे की भावना को विस्तार से साझा किया है। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद से अधिक महत्वपूर्ण देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य और शिक्षा व्यवस्था पर जनता का विश्वास है।
अपने पत्र की शुरुआत में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि वे पिछले 40 वर्षों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं तथा हमेशा एक सशक्त, समावेशी और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और युवाओं के सपनों को साकार करना उनके सार्वजनिक जीवन का प्रमुख उद्देश्य रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर मिलने पर आभार भी व्यक्त किया।
पत्र में उन्होंने स्वीकार किया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। इसके साथ ही परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार ने अगले वर्ष से NEET परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (Computer-Based Test) के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि सरकार की पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों की परीक्षा पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न हो। इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, अभिभावकों और विद्यार्थियों के सहयोग से व्यापक स्तर पर कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि इन सभी के संयुक्त प्रयासों से 21 जून 2026 को परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई और 16 जुलाई को घोषित परिणाम भी संतोषजनक रहे, जिनमें आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि के अनेक मेधावी छात्रों को सफलता मिली।
अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही इस पूरे प्रकरण की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे। उनका स्पष्ट संकल्प था कि किसी भी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया या किसी भी प्रकार की अनियमितता के कारण प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों का विश्वास सर्वोपरि है तथा सरकार ने इसी भावना के साथ सभी आवश्यक कदम उठाए।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पूरे घटनाक्रम के दौरान कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, जिससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी पीड़ा हुई। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाएं उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं थीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न थीं।
पत्र में उन्होंने लोकतंत्र और युवाओं की शक्ति पर अपना अटूट विश्वास दोहराते हुए कहा कि भारत की युवा शक्ति ही देश के विकसित भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी छात्र को भ्रम, राजनीति या कानूनी उलझनों में फंसने नहीं देना चाहते। उनका मानना है कि विद्यार्थियों को अपना समय केवल पढ़ाई, ज्ञान अर्जन और अपने करियर के निर्माण में लगाना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि इन्हीं भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि उनका यह निर्णय किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, नैतिक जिम्मेदारी और छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की भावना से प्रेरित है।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया तथा कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में भी वे भारत माता, विशेष रूप से युवाओं की आकांक्षाओं और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक योगदान देने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करते रहेंगे। उन्होंने भगवान श्रीजगन्नाथ के आशीर्वाद का स्मरण करते हुए देशवासियों से शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को मजबूत करने का आह्वान किया।
