हैदराबाद: देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद कुछ सरकारी अधिकारी अवैध कमाई के जरिए अकूत संपत्ति जुटाने से बाज नहीं आ रहे हैं। तेलंगाना से सामने आया एक मामला सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है। तेलंगाना भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक सरकारी इंजीनियर के ठिकानों पर छापेमारी कर ऐसी संपत्तियों का खुलासा किया है, जिसने जांच एजेंसियों के साथ-साथ आम लोगों को भी हैरान कर दिया। प्रारंभिक जांच में इंजीनियर के पास 10 अपार्टमेंट, 2 किलोग्राम से अधिक सोना, करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियां, लग्जरी वाहन, बैंक जमा राशि और अन्य कीमती सामान मिलने का दावा किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और वास्तविक संपत्ति का मूल्य 100 से 150 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है।
तेलंगाना ACB ने नवीकरणीय ऊर्जा विकास निगम (REDCO) में खैरताबाद, हैदराबाद स्थित डिविजनल इंजीनियर मुत्यम वेंकट रमणा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में उनकी ज्ञात आय और उनके नाम तथा कथित तौर पर उनके परिवार एवं सहयोगियों के नाम पर मौजूद संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर सामने आने के बाद ACB ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। इस कार्रवाई के तहत इंजीनियर के आवास, कार्यालय, रिश्तेदारों, करीबी सहयोगियों और कथित बेनामी व्यक्तियों से जुड़े कुल आठ स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई।
तलाशी के दौरान जांच अधिकारियों को बड़ी संख्या में अचल संपत्तियों के दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, निवेश संबंधी कागजात और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले। ACB का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि सरकारी सेवा के दौरान भ्रष्ट तरीकों से बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित की गई। इसी आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू की गई है।
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा इंजीनियर के नाम और उससे जुड़े लोगों के नाम पर मौजूद रियल एस्टेट निवेश को लेकर हुआ। अधिकारियों के अनुसार, सेरिलिंगमपल्ली और कुकटपल्ली क्षेत्र में चार आवासीय फ्लैट मिले हैं, जिनकी पंजीकृत कीमत लगभग 1.23 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा कुकटपल्ली के अंजनेया नगर में 160 वर्ग गज क्षेत्र में निर्मित एक G+3 व्यावसायिक भवन भी मिला, जिसकी आधिकारिक कीमत करीब 1.82 करोड़ रुपये आंकी गई है। वहीं सेरिलिंगमपल्ली के गुट्टाला बेगमपेट इलाके में 250 वर्ग गज क्षेत्र में बना G+5 व्यावसायिक भवन भी जांच के दायरे में आया, जिसका आधिकारिक मूल्य लगभग 2.90 करोड़ रुपये बताया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इंजीनियर ने अपनी पत्नी के नाम पर पंजीकृत चार निर्माण कंपनियों के माध्यम से रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया था। इन्हीं कंपनियों के जरिए अंजनेया नगर, मूसापेट क्षेत्र में 10 निर्माणाधीन आवासीय अपार्टमेंट विकसित किए जा रहे थे। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इन परियोजनाओं में करीब 20 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। अधिकारियों को संदेह है कि इन कंपनियों का उपयोग अवैध कमाई को वैध निवेश के रूप में दिखाने के लिए किया गया हो सकता है। इस पहलू की भी विस्तार से जांच की जा रही है।
अचल संपत्तियों के अलावा छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में चल संपत्ति भी बरामद हुई। ACB के अनुसार, लगभग 52.02 लाख रुपये की बैंक जमा राशि, 2.094 किलोग्राम सोने के आभूषण, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 4 करोड़ रुपये बताई जा रही है, बरामद किए गए। इसके अलावा करीब 45 लाख रुपये मूल्य की तीन गाड़ियां—किआ, महिंद्रा और मारुति बलेनो—भी जांच एजेंसी के कब्जे में ली गई हैं। घर से लगभग 30 लाख रुपये मूल्य के महंगे घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी मिले हैं। इतना ही नहीं, अधिकारियों ने करीब 2.5 लाख रुपये मूल्य की विदेशी ब्रांड की 20 शराब की बोतलें भी बरामद की हैं।
ACB द्वारा जारी प्रारंभिक आकलन के अनुसार बरामद संपत्तियों का आधिकारिक मूल्य लगभग 27.65 करोड़ रुपये है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह केवल दस्तावेजों में दर्ज कीमत है। वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर इन संपत्तियों की वास्तविक कीमत इससे कई गुना अधिक हो सकती है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि सभी अचल संपत्तियों, निर्माण परियोजनाओं, निवेशों और अन्य परिसंपत्तियों का बाजार मूल्य जोड़ा जाए तो कुल संपत्ति 100 से 150 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। जांच एजेंसी अब अन्य संभावित निवेशों, बेनामी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है।
इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरोपी इंजीनियर का नाम पहले भी रिश्वतखोरी के मामले में सामने आ चुका है। ACB के रिकॉर्ड के अनुसार, 12 दिसंबर 2019 को उन्हें एक ट्रैप ऑपरेशन के दौरान 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। उस समय वे हैदराबाद के साइबर सिटी सर्किल में सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (ऑपरेशंस) कार्यालय में डिविजनल इंजीनियर (टेक्निकल) के पद पर कार्यरत थे। आरोप था कि उन्होंने अंतिम अनुमान स्वीकृति देने के बदले रिश्वत की मांग की थी। उस कार्रवाई के दौरान भी उनके पास से 26.52 लाख रुपये नकद और लगभग 22.60 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण बरामद हुए थे। बाद में उनके खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया गया था।
अब दोबारा सामने आए इस बड़े खुलासे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पहले रिश्वतखोरी के मामले में कार्रवाई होने के बावजूद आरोपी इतनी बड़ी संपत्ति कैसे जुटाने में सफल रहा। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस पूरे नेटवर्क में अन्य सरकारी अधिकारी, कारोबारी या बेनामी सहयोगी भी शामिल हैं। वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, कंपनियों के दस्तावेजों और संपत्ति खरीद से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी इंजीनियर को विशेष अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। साथ ही उनकी आय, निवेश, कंपनियों और परिवार से जुड़े वित्तीय स्रोतों की विस्तृत जांच जारी रहेगी। यदि जांच के दौरान और संपत्तियां सामने आती हैं तो उन्हें भी जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। ACB का कहना है कि भ्रष्टाचार से अर्जित अवैध संपत्ति के पूरे नेटवर्क का खुलासा होने तक जांच जारी रहेगी।
तेलंगाना का यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि भ्रष्टाचार के जरिए अर्जित संपत्ति का दायरा कितना बड़ा हो सकता है। सरकारी पद का दुरुपयोग कर अवैध कमाई करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच, पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया और दोषियों के खिलाफ कठोर दंड ही भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगा सकते हैं। फिलहाल ACB की यह कार्रवाई राज्य में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी आय से अधिक संपत्ति की जांचों में से एक मानी जा रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
