पुणे में सामने आए केतन अग्रवाल हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पहली नजर में यह मामला एक दर्दनाक हादसा प्रतीत हो रहा था, लेकिन पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने इस घटना को एक सुनियोजित और खौफनाक हत्या की साजिश में बदल दिया। पुलिस के अनुसार, 20 वर्षीय सिया गोयल ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। जांच में खुलासा हुआ है कि वारदात से कुछ घंटे पहले ही दोनों एक कैफे में मिले थे और हत्या की पूरी रणनीति तैयार की थी।
प्री-बर्थडे सरप्राइज के बहाने बुलाया मौत के मुंह में
पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय केतन अग्रवाल और 20 वर्षीय सिया गोयल की फरवरी में सगाई हुई थी। दोनों की शादी इसी वर्ष नवंबर में होने वाली थी। 19 जून को सिया का जन्मदिन था और उसने केतन को प्री-बर्थडे सेलिब्रेशन के बहाने 18 जून को लोहागढ़ किले पर चलने के लिए राजी कर लिया। केतन को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि जिस लड़की से वह शादी करने जा रहा है, वही उसकी मौत की साजिश रच चुकी है।
जांच में सामने आया है कि सिया ने पहले से ही अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर केतन को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया था। इसके लिए लोहागढ़ किले जैसी सुनसान और खतरनाक जगह को चुना गया, जहां घटना को आसानी से दुर्घटना का रूप दिया जा सके।
हत्या से पहले कैफे में बनी थी पूरी योजना
पुलिस जांच के दौरान एक अहम खुलासा हुआ कि 18 जून की सुबह सिया और चेतन पुणे के एक कैफे में मिले थे। दोनों ने वहां बैठकर हत्या की पूरी योजना बनाई। उन्होंने यह तय किया कि किले के किस हिस्से में केतन को धक्का दिया जाएगा और किस तरह पूरी घटना को दुर्घटना दिखाया जाएगा।
जांच अधिकारियों के अनुसार, दोनों ने पहले ही किले के ऐसे स्थानों की पहचान कर ली थी जहां गहरी खाई थी और जहां से किसी व्यक्ति के गिरने पर उसके बचने की संभावना बेहद कम हो। इसी योजना के तहत दोपहर में सिया केतन को अपने साथ किले पर ले गई, जबकि चेतन उनसे कुछ दूरी बनाकर पीछे-पीछे ट्रेक करता रहा।
पहले भी हो चुकी थी हत्या की कोशिश
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि केतन की हत्या की यह पहली कोशिश नहीं थी। सिया इससे पहले भी कई बार उसे लोहागढ़ किले पर ले जाने का प्रयास कर चुकी थी।
31 मई को दोनों किले पर गए थे। इसके बाद सिया ने कुछ दिनों बाद फिर वहां जाने का दबाव बनाया, लेकिन केतन की मां ने उसे दूसरी बार जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बावजूद सिया ने हार नहीं मानी और 14 जून को फिर से किले पर जाने की योजना बनाई।
जांच में शामिल अधिकारियों का दावा है कि 14 जून को सिया ने कथित तौर पर केतन को एक चट्टान से नीचे धकेलने की कोशिश की थी। हालांकि, केतन समय रहते एक झाड़ी पकड़ने में सफल रहा और उसकी जान बच गई। जब उसने सिया से पूछा कि ऐसा क्यों हुआ, तो उसने सांप दिखने का बहाना बनाया और दावा किया कि वह उसे बचाने की कोशिश कर रही थी।
इस घटना के बाद भी केतन को सिया पर कोई शक नहीं हुआ और यही विश्वास अंततः उसकी मौत का कारण बन गया।
हुडी पहनकर पीछा करता रहा प्रेमी
18 जून को जब सिया और केतन लोहागढ़ किले की ओर जा रहे थे, तब चेतन चौधरी भी उनके पीछे-पीछे ट्रेक कर रहा था। सामान्यतः यह ट्रेक तीन से चार घंटे का माना जाता है। जांच में सामने आया है कि ट्रेक के दौरान चेतन लगातार इशारों के जरिए सिया से संपर्क बनाए हुए था।
सीसीटीवी फुटेज में भी एक संदिग्ध युवक दिखाई दिया जो शॉर्ट्स और हुडी पहनकर सिया और केतन के पीछे चल रहा था। वह लगभग 20 से 30 फीट की दूरी बनाए हुए था। उसने अपना चेहरा हुडी से ढका हुआ था और कानों में हेडसेट लगा रखा था।
एक अन्य सीसीटीवी फुटेज में सिया अचानक पीछे मुड़कर उसी व्यक्ति की ओर देखती हुई दिखाई देती है। उसी समय वह व्यक्ति नीचे बैठ जाता है, मानो खुद को कैमरे या लोगों की नजरों से बचाने की कोशिश कर रहा हो। इस हरकत ने पुलिस के शक को और मजबूत कर दिया।
गर्मी में हुडी पहनना बना सुराग
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटना वाले दिन इलाके का तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस था। इतनी गर्मी में कोई व्यक्ति ट्रेकिंग के दौरान हुडी पहनकर चले, यह बात जांचकर्ताओं को असामान्य लगी।
इसी आधार पर पुलिस ने उस व्यक्ति की पहचान करने का प्रयास शुरू किया। तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल सबूतों की मदद से जांच टीम जल्द ही सिया और उस संदिग्ध युवक के बीच संबंधों तक पहुंच गई।
बाद में उस युवक की पहचान 22 वर्षीय चेतन बाबूलाल चौधरी के रूप में हुई। पुलिस ने उसके सोशल मीडिया प्रोफाइल की तस्वीरों की तुलना सीसीटीवी फुटेज से की, जिसमें कई समानताएं पाई गईं। इसके बाद जांच का फोकस पूरी तरह सिया और चेतन पर केंद्रित हो गया।
2004 फोन कॉल ने खोला राज
जांच के दौरान पुलिस को एक और महत्वपूर्ण सुराग मिला। अधिकारियों ने पाया कि केतन की मौत के बाद सिया का व्यवहार सामान्य शोकग्रस्त व्यक्ति जैसा नहीं था। वह अपने मंगेतर की मौत से उतनी दुखी नजर नहीं आ रही थी, जितनी स्वाभाविक रूप से अपेक्षित थी।
इसके अलावा केतन के परिजनों ने भी पुलिस को बताया कि सिया शादी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थी। उसने एक बार शादी को एक साल तक टालने की इच्छा भी जाहिर की थी।
इसके बाद पुलिस ने दोनों के कॉल रिकॉर्ड खंगाले। जांच में सामने आया कि पिछले सात महीनों में सिया और चेतन के बीच कुल 2004 फोन कॉल हुई थीं। दोनों ने लगभग 238 घंटे तक एक-दूसरे से बातचीत की थी। यह आंकड़ा पुलिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ और इससे दोनों के रिश्ते की गहराई का पता चला।
प्रेम संबंध बना हत्या की वजह
पुलिस का मानना है कि सिया और चेतन एक-दूसरे से प्रेम करते थे और शादी के बाद उनका रिश्ता आगे नहीं बढ़ पाता। इसी कारण दोनों ने मिलकर केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
जांच में मिले सबूतों के आधार पर पुलिस का कहना है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि कई दिनों से चल रही एक सुनियोजित योजना थी। पहले भी हत्या की कोशिशें की गईं और अंततः 18 जून को दोनों ने अपने मकसद को पूरा कर लिया।
दोनों आरोपी गिरफ्तार
मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत ने उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
फिलहाल पुलिस इस मामले के हर पहलू की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी प्रमाण इस केस को मजबूत बना रहे हैं।
विश्वासघात की दर्दनाक कहानी
केतन अग्रवाल हत्याकांड केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह विश्वास, प्रेम और रिश्तों में छिपे धोखे की एक दर्दनाक कहानी भी है। जिस लड़की के साथ केतन ने अपना भविष्य देखने का सपना संजोया था, उसी ने कथित तौर पर अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसकी जिंदगी खत्म करने की साजिश रच दी।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से योजना बनाएं, लेकिन आधुनिक जांच तकनीक, डिजिटल सबूत और पुलिस की सतर्कता के सामने सच ज्यादा देर तक छिप नहीं सकता।
