कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला क्षेत्र में मंगलवार को एक बड़ा निर्माण हादसा सामने आया, जब एक निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक भरभराकर गिर गई। इस दुर्घटना में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि बड़ी संख्या में मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे के समय निर्माण स्थल पर कई मजदूर कार्यरत थे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया।
यह हादसा कोलकाता के पश्चिमी हिस्से में स्थित तारातला थाना क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक गिर गई, जिससे वहां काम कर रहे मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते भारी भरकम लोहे की बीमें और कंक्रीट का मलबा मजदूरों पर आ गिरा। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर बचाव कार्य शुरू कर दिया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए कोलकाता पुलिस, दमकल विभाग, सिविल डिफेंस तथा आपदा प्रबंधन समूह की कई टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान शुरू किया। प्रारंभिक बचाव कार्य के दौरान छह से सात मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिन्हें तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मलबे के नीचे अभी भी 40 से 45 लोगों के दबे होने की आशंका है। इसी कारण बचाव कार्य को और तेज कर दिया गया है। घटनास्थल पर भारी-भरकम क्रेन, जेसीबी मशीनें और अन्य आधुनिक उपकरणों को तैनात किया गया है, ताकि मलबे को तेजी से हटाया जा सके। राहत कर्मियों को लोहे की विशाल बीमों और टूटे हुए ढांचे को हटाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कोलकाता पुलिस ने बताया कि दुर्घटना की सूचना मिलते ही सभी संबंधित एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया था। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य में जुट गईं। इसके अलावा आपदा प्रबंधन विभाग के विशेषज्ञ भी घटनास्थल पर मौजूद हैं और पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है।
हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है। नबान्न स्थित आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, जिनके माध्यम से लोग अपने परिजनों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। मलबे में फंसे मजदूरों के परिजन और परिचित अपने प्रियजनों की जानकारी पाने के लिए मौके पर पहुंच रहे हैं। कई परिवारों की चिंता और बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। अस्पतालों में भी प्रशासन ने अतिरिक्त व्यवस्था की है ताकि घायलों का तत्काल उपचार किया जा सके।
इस बीच, कोलकाता नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे हैं। हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्रारंभिक तौर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि निर्माणाधीन ढांचे की छत आखिर किन परिस्थितियों में गिरी। निर्माण कार्य में किसी प्रकार की तकनीकी लापरवाही, घटिया निर्माण सामग्री या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन न होने के कारण इस प्रकार की दुर्घटनाएं सामने आती हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकाल लिया जाएगा। राज्य सरकार भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरे शहर की निगाहें अब राहत-बचाव अभियान पर टिकी हुई हैं और लोग मलबे में फंसे मजदूरों के सुरक्षित बाहर आने की प्रार्थना कर रहे हैं।
