
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर से इस वक्त की सबसे बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आ रही है। जयपुर के पॉश इलाके मालवीय नगर में बुनियादी ढांचे और सड़क विकास की राह में आ रहे अतिक्रमणों को हटाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा मालवीय नगर स्थित करीब 45 साल पुरानी ‘नूरानी मस्जिद’ सहित कई धार्मिक स्थलों पर बुलडोजर चलाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। इस बड़ी और कानून-व्यवस्था के लिहाज से बेहद संवेदनशील कार्रवाई को देखते हुए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
प्रशासन ने किसी भी तरह की अप्रिय घटना, कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति या अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए इलाके में आगामी 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से बंद (Internet Shutdown) कर दिया है। इसके साथ ही चप्पे-चप्पे पर पुलिस और सुरक्षाबलों की पैनी नजर है।
3000 सुरक्षाकर्मियों का अभेद्य पहरा, पुलिस ने किया फ्लैग मार्च
जयपुर नूरानी मस्जिद बुलडोजर एक्शन की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जयपुर पुलिस और आरएसी (RAC) के लगभग 3000 सुरक्षाकर्मियों को मैदान में उतारा गया है। रविवार शाम से ही पुलिस के आला अधिकारियों की अगुवाई में भारी सुरक्षा बल ने पूरे मालवीय नगर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किया।
मुंबई जैसी घटना से सबक:
हाल ही में मुंबई के बांद्रा इलाके में बीएमसी (BMC) द्वारा एक अवैध धार्मिक निर्माण को हटाने के दौरान प्रशासनिक टीम और पुलिस पर उग्र भीड़ ने हमला कर दिया था, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। जयपुर पुलिस प्रशासन उस घटना से सबक लेते हुए किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। ड्रोन कैमरों के जरिए छतों और तंग गलियों की निगरानी की जा रही है।
क्यों चल रहा है बुलडोजर? जानिए क्या है जेडीए का मास्टर प्लान
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई किसी समुदाय विशेष को लक्षित करके नहीं, बल्कि जयपुर शहर की रीढ़ बन चुकी यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए की जा रही है। मालवीय नगर के इस मुख्य मार्ग पर लंबे समय से भारी जाम की समस्या बनी रहती थी, क्योंकि सड़क बेहद संकरी है। शहर के मास्टर प्लान के तहत इस सड़क का चौड़ीकरण (Road Widening) किया जाना बेहद अनिवार्य है।
अब इसी सड़क परियोजना को पूरा करने के लिए नूरानी मस्जिद के साथ-साथ एक मजार, दो छोटे मंदिर और एक सत्संग भवन को भी हटाने का रोडमैप तैयार किया गया है।
1981 में बनी थी मस्जिद, कमेटी ने समय न मिलने का लगाया आरोप
नूरानी मस्जिद से जुड़े विवाद पर मस्जिद प्रबंधन और स्थानीय लोगों का अपना पक्ष है, जिसके कारण इलाके में तनाव की सुगबुगाहट है। मस्जिद कमेटी के पदाधिकारियों का दावा है कि यह मस्जिद वर्ष 1981 (करीब 45 साल पहले) में लगभग 391 वर्ग गज भूमि पर बनाई गई थी। तब से लेकर आज तक यहाँ नियमित रूप से पांचों वक्त की नमाज अदा की जाती है, जिसमें सैकड़ों अकीदतमंद शामिल होते हैं।
मस्जिद कमेटी का आरोप है कि उन्हें जेडीए की तरफ से 5 मई को नोटिस तामील कराया गया, जिसमें 8 तारीख को डिमोलिशन (ध्वस्तीकरण) की बात कही गई। कमेटी का तर्क है कि यह जमीन उन्होंने जेडीए से स्वीकृत एक हाउसिंग सोसाइटी से कानूनी रूप से खरीदी थी, इसलिए इसे पूरी तरह अवैध ठहराना गलत है। उन्हें अदालत जाने या अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।
तनाव कम करने की कोशिश: जेडीए ने दी वैकल्पिक जमीन की पेशकश
प्रशासन इस पूरे मामले को केवल बलपूर्वक नहीं, बल्कि आपसी समझ और कूटनीतिक तरीके से सुलझाने का प्रयास भी कर रहा है। मामले की संवेदनशीलता और धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए जेडीए के आला अधिकारियों ने मस्जिद कमेटी के साथ कई दौर की बैठकें की हैं।
| प्रभावित धार्मिक स्थल | क्षेत्रफल (लगभग) | जेडीए द्वारा दिया गया विकल्प |
| नूरानी मस्जिद (मालवीय नगर) | 391 वर्ग गज | खो नागोरियन क्षेत्र में लगभग 1100 वर्ग गज वैकल्पिक भूमि |
जेडीए ने मस्जिद को स्थानांतरित करने के लिए खो नागोरियन जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्र में वर्तमान जमीन से लगभग तीन गुना बड़ी (1100 वर्ग गज) वैकल्पिक भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव दिया है। प्रशासन का कहना है कि विकास कार्यों के लिए धार्मिक स्थलों का शांतिपूर्ण स्थानांतरण पहले भी कई शहरों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है और यहाँ भी मंदिरों और सत्संग भवन के प्रबंधकों से बातचीत की जा रही है।
नूरानी मस्जिद से जुड़ी 5 सबसे अहम बातें
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मस्जिद का निर्माण साल 1981 में हुआ था और यह करीब 45 वर्षों से इस क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र रही है।
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सड़क विकास में बाधा: जेडीए के मुताबिक, बिना इस हिस्से को हटाए मालवीय नगर की मुख्य सड़क को चौड़ा करना तकनीकी रूप से असंभव है।
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चौतरफा कार्रवाई: इस ध्वस्तीकरण अभियान में केवल मस्जिद ही नहीं, बल्कि एक मजार, दो मंदिर और एक सत्संग भवन भी शामिल हैं।
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सख्त सुरक्षा घेरा: अफवाहों और सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट को रोकने के लिए इंटरनेट सेवा पूरी तरह ठप की गई है और 3000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
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पुनर्वास का प्रस्ताव: जेडीए ने प्रभावित पक्ष को खो नागोरियन में बड़ी वैकल्पिक भूमि देने की बात कही है ताकि धार्मिक गतिविधियों को आगे जारी रखा जा सके।
चुनौतीपूर्ण मोड़ पर जयपुर प्रशासन: शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता
जयपुर नूरानी मस्जिद बुलडोजर एक्शन राजस्थान सरकार और जयपुर जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है। एक तरफ जहाँ शहर के विकास और जाम से मुक्ति के लिए इस संकरी सड़क को चौड़ा करना समय की मांग है, वहीं दूसरी तरफ दशकों पुराने धार्मिक स्थलों को हटाने से जुड़ी जनभावनाओं को संभालना भी एक नाजुक काम है।
राजधानी जयपुर को स्मार्ट और जाम-मुक्त बनाने की दिशा में जेडीए का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इस दौरान सामाजिक सद्भाव और शांति बनाए रखना प्रशासन की सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। देखना यह होगा कि आज होने वाली इस बड़ी कार्रवाई को पुलिस और प्रशासन कितनी सूझबूझ और शांतिपूर्ण ढंग से अंजाम दे पाता है। पूरे प्रदेश की नजरें आज मालवीय नगर के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।



