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Uttarakhand: आदि कैलाश की ऊँचाइयों पर रचा इतिहास — उत्तराखंड में पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन का भव्य आयोजन

The Hill India News
Last updated: November 2, 2025 1:29 pm
The Hill India News
Published: November 2, 2025
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पिथौरागढ़ / आदि कैलाश: हिमालय की पवित्र गोद में स्थित आदि कैलाश आज इतिहास रचते हुए देश-विदेश में चर्चा का केंद्र बन गया। राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष (25 वर्ष) के अवसर पर रविवार को यहाँ उत्तराखंड की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन का सफल आयोजन हुआ।

Contents
हिमालय की ऊँचाइयों में ‘साहस की दौड़’आईटीबीपी और सेना का सहयोग बना आयोजन की रीढ़प्रधानमंत्री के विजन को मिला विस्तार“यह आयोजन उत्तराखंड की नई उड़ान का प्रतीक” – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी“सीमांत विकास और युवा ऊर्जा — यही है नया उत्तराखंड”पर्यटन सचिव और जिला प्रशासन की सक्रिय भूमिकास्थानीय जनता में उत्साह, युवाओं में प्रेरणारजत जयंती वर्ष में दर्ज हुई ऐतिहासिक उपलब्धि

भारत-तिब्बत सीमा क्षेत्र की कठोर भौगोलिक परिस्थितियों के बीच आयोजित यह 60 किलोमीटर लंबी अल्ट्रा रन न केवल साहस और धैर्य की परीक्षा थी, बल्कि राज्य के साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) और खेल संस्कृति के विकास की दिशा में मील का पत्थर भी साबित हुई।


हिमालय की ऊँचाइयों में ‘साहस की दौड़’

इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में देश के 22 राज्यों से 700 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। ऊँचाई पर फैले पत्थरीले और बर्फीले रास्तों के बीच प्रतिभागियों ने अपने अदम्य साहस, अनुशासन और फिटनेस का प्रदर्शन किया।
दौड़ का आरंभ पवित्र आदि कैलाश से हुआ, जिसे हिंदू धर्म में ‘भगवान शिव का दिव्य निवास स्थल’ माना जाता है। प्रतिभागियों ने कठिन भू-भाग और तीव्र ठंड के बावजूद उत्साह और ऊर्जा के साथ दौड़ पूरी की।

आयोजन के दौरान स्थानीय जनता, सेना और प्रशासनिक अधिकारियों ने जगह-जगह प्रतिभागियों का स्वागत किया। हिमालयी घाटियों में गूंजते जयकारों और राष्ट्रगान की धुनों ने इस आयोजन को राष्ट्रीय गौरव का स्वरूप दिया।


आईटीबीपी और सेना का सहयोग बना आयोजन की रीढ़

इस चुनौतीपूर्ण आयोजन की सफलता में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और भारतीय सेना का विशेष सहयोग रहा। सुरक्षा, ट्रैक प्रबंधन और चिकित्सा सुविधाओं की उत्कृष्ट व्यवस्था से धावकों को हर संभव सुविधा प्रदान की गई।
प्रतिभागियों ने आयोजन के बाद सरकार, प्रशासन और सुरक्षा बलों की व्यवस्थित योजना, सुरक्षा और सहयोग की सराहना की।
एक प्रतिभागी ने कहा, “हिमालय की ऊँचाई पर दौड़ना जीवन का सबसे बड़ा अनुभव रहा। सेना और ITBP ने हर कदम पर हमारा हौसला बढ़ाया। यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना का उत्सव था।”


प्रधानमंत्री के विजन को मिला विस्तार

प्रतिभागियों और स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दौरे के बाद इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री के “हिमालयी क्षेत्रों में शीतकालीन और साहसिक पर्यटन” को प्रोत्साहन देने के दृष्टिकोण को यह आयोजन वास्तविक विस्तार देता है।
आदि कैलाश और उसके आस-पास के क्षेत्रों में सड़क संपर्क, होमस्टे, स्थानीय हस्तशिल्प और ग्रामीण पर्यटन के विकास से अब सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने की उम्मीद जताई जा रही है।


“यह आयोजन उत्तराखंड की नई उड़ान का प्रतीक” – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन के सफल आयोजन पर सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को बधाई दी।
उन्होंने कहा,

“यह आयोजन उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण है। आदि कैलाश जैसे पवित्र और आध्यात्मिक धाम में आयोजित यह ऐतिहासिक अल्ट्रा रन न केवल साहस और समर्पण की मिसाल है, बल्कि सीमांत क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन और खेल संस्कृति को नई दिशा देगा। राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यह आयोजन उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य और असीम संभावनाओं का प्रतीक है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और उनके द्वारा आदि कैलाश में किए गए दर्शन के बाद इस क्षेत्र में पर्यटन, आधारभूत ढांचे और धार्मिक गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिमालयी और शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्यरत है।


“सीमांत विकास और युवा ऊर्जा — यही है नया उत्तराखंड”

मुख्यमंत्री धामी ने आगे कहा कि,

“सीमांत क्षेत्रों का विकास हमारी प्राथमिकता है। अल्ट्रा मैराथन जैसे आयोजन न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देते हैं बल्कि युवा पीढ़ी में साहसिक खेलों के प्रति उत्साह भी पैदा करते हैं। आने वाले समय में उत्तराखंड साहसिक खेलों और पर्वतीय पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनेगा।”

उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि यह क्षेत्र देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार “अमृत काल 2047” के लक्ष्य के अनुरूप पर्यटन, खेल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के एकीकृत विकास पर कार्य कर रही है, ताकि उत्तराखंड को ‘भारत का सबसे अग्रणी पर्वतीय पर्यटन राज्य’ बनाया जा सके।


पर्यटन सचिव और जिला प्रशासन की सक्रिय भूमिका

आयोजन में पर्यटन विभाग, आईटीबीपी, सेना, पुलिस, जिला प्रशासन, और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही।
पर्यटन सचिव ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से राज्य में “सस्टेनेबल एडवेंचर टूरिज्म मॉडल” को स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि अगले वर्ष से इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करने की योजना है, ताकि वैश्विक धावक समुदाय को भी उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव कराया जा सके।


स्थानीय जनता में उत्साह, युवाओं में प्रेरणा

आदि कैलाश घाटी में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। हजारों लोगों ने सड़क किनारे खड़े होकर धावकों का उत्साहवर्धन किया। ग्रामीणों ने पारंपरिक नृत्य और लोकगीतों से प्रतिभागियों का स्वागत किया।
स्थानीय युवाओं ने कहा कि यह आयोजन क्षेत्र की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करेगा और आने वाले वर्षों में यहाँ होमस्टे, ट्रेकिंग, योग पर्यटन और पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों को नया जीवन देगा।


रजत जयंती वर्ष में दर्ज हुई ऐतिहासिक उपलब्धि

उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष में यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राज्य की साहसिक भावना, आत्मनिर्भरता और नई पहचान का प्रतीक बन गया है।
आदि कैलाश से शुरू हुई यह “साहसिक यात्रा” उत्तराखंड के पर्वतीय जनजीवन में एक नई ऊर्जा लेकर आई है — ऐसी ऊर्जा जो विकास, पर्यटन, संस्कृति और पर्यावरण के संतुलन के साथ भविष्य की दिशा तय करेगी।

उत्तराखंड की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन ने यह संदेश दिया है कि हिमालय केवल तप और अध्यात्म की भूमि नहीं, बल्कि साहस, ऊर्जा और प्रगति का प्रतीक भी है। प्रधानमंत्री के हिमालयी पर्यटन विजन और मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य अब एक ऐसे नए दौर में प्रवेश कर रहा है जहाँ सीमांत क्षेत्र केवल सीमाएँ नहीं, बल्कि संभावनाओं के द्वार बन रहे हैं।

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