नई दिल्ली। दिल्ली में हुए हालिया बम धमाके की जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है और पुलिस की तफ्तीश का दायरा लगातार बड़ा होता जा रहा है। जांच के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को दो समन जारी किए हैं। पुलिस ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ पहले से ही दो FIR दर्ज कर रखी हैं और अब मामले में कई अहम कड़ियां इस संस्थान से जुड़ती दिख रही हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक अब तक सामने आए तकनीकी डाटा, संदिग्ध गतिविधियों और पकड़े गए लोगों की पूछताछ में जो सुराग मिले हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के कामकाज, फंडिंग और गतिविधियों की गहराई से पड़ताल करने पर मजबूर किया है। इसी वजह से चेयरमैन जावेद अहमद से पूछताछ को “अत्यंत आवश्यक” माना जा रहा है।
बम धमाके से जुड़े सभी तार अल-फलाह यूनिवर्सिटी तक क्यों पहुंच रहे हैं?
क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार, कई तकनीकी लोकेशन, संदिग्ध कॉल डाटा रिकॉर्ड, कुछ गिरफ्तार संदिग्धों की यूनिवर्सिटी परिसर में आवाजाही और यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ कर्मचारियों पर खुफिया एजेंसियों की नजर—इन सबने जांच को एक नई दिशा दी है।
हालांकि, पुलिस अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है, लेकिन प्रारंभिक जांच में कई संदेहपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
क्राइम ब्रांच का कहना है कि जावेद अहमद सिद्दीकी से पूछताछ बेहद अहम होगी क्योंकि वह संस्थान के सभी प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की “टॉप अथॉरिटी” माने जाते हैं। समन भेजे जाने के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि वह तफ्तीश में कब शामिल होंगे। पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि यदि वह जांच में सहयोग नहीं करते, तो आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
कौन हैं जावेद अहमद सिद्दीकी?—पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की फाइल फिर खुली
मामले की गहराई बढ़ने के साथ अब जनता के मन में यह स्वाभाविक सवाल उठ रहा है—जावेद अहमद आखिर कौन हैं?
जावेद अहमद सिद्दीकी मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं और लंबे समय से शिक्षा, कारोबार और विभिन्न निवेश योजनाओं में सक्रिय रहे हैं। डॉक्यूमेंट्स और पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि वह अल-फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर और मैनेजिंग ट्रस्टी भी हैं।
लेकिन जावेद का नाम यह पहला आपराधिक विवाद नहीं है जिसमें सामने आया हो।
9 कंपनियों से जुड़ा बड़ा वित्तीय घोटाला
पुलिस के अनुसार, जावेद के खिलाफ पहले भी कई कंपनियों को लेकर गंभीर आरोप लग चुके हैं।
उनकी कुल 9 कंपनियाँ—शिक्षा, सॉफ्टवेयर, ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों से जुड़ी थीं।
इन्हीं कंपनियों के जरिए निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये जुटाने का आरोप लगा था।
यह मामला समय के साथ इतना गंभीर हुआ कि दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाना में उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई।
आरोप था कि—
- लोगों से पैसे निवेश योजना के नाम पर लिए गए,
- कई कंपनियां सिर्फ कागजों पर चलाई गईं,
- करोड़ों रुपये व्यक्तिगत खातों में ट्रांसफर किए गए।
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने भी उस समय मामले की गंभीरता को देखते हुए कई महीनों तक जांच की थी।
सिर्फ जावेद ही नहीं, परिवार पर भी कार्रवाई की गई थी
मामले की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद और उनके डायरेक्टर सऊद अहमद सिद्दीकी को उस घोटाले में 7.5 करोड़ रुपये के फ्रॉड के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और दोनों कई महीनों तक जेल में रहे थे।
कहा जाता है कि यह पहला मौका नहीं था जब उनकी किसी वित्तीय गतिविधि पर सवाल उठे हों।
कई जांचों में यह भी सामने आया था कि उनकी कुछ कंपनियां बिना उचित लाइसेंस और बिना वैलिड डॉक्यूमेंट्स के संचालित की जा रही थीं।
अब बम धमाके की जांच में क्यों आया उनका नाम?
दिल्ली धमाके की जांच में यूनिवर्सिटी का नाम सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जावेद और उनकी यूनिवर्सिटी की गतिविधियों का “डीप स्कैन” शुरू किया है।
सूत्रों का दावा है कि—
- कुछ संदिग्धों ने यूनिवर्सिटी परिसर से “लॉजिस्टिक सपोर्ट” लेने की बात स्वीकारी है,
- कुछ डिजिटल डिवाइस और लोकेशन यूनिवर्सिटी के आसपास एक्टिव पाए गए,
- यूनिवर्सिटी का नेटवर्क कई संदिग्ध संस्थाओं से जुड़ा मिला।
हालांकि, पुलिस अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं कर रही है, लेकिन क्राइम ब्रांच के समन से स्पष्ट है कि जावेद अहमद से पूछताछ जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कानूनी विशेषज्ञों की राय—जांच का दायरा और बढ़ सकता है
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जावेद जांच में शामिल नहीं होते हैं, तो पुलिस उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) या फिर लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी कर सकती है।
इसके अलावा यदि यूनिवर्सिटी की वित्तीय या प्रशासनिक गतिविधियों में कोई गड़बड़ी पाई गई, तो मामला EOW, ED या NIA तक भी पहुंच सकता है।
जांच के अगले चरण पर अब नज़रें टिकीं
दिल्ली धमाके जैसी गंभीर घटना में अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सामने आना खुद में एक बड़ा सवाल है।
जांच एजेंसियां लगातार एक्टिव मोड में हैं और अगले 48 घंटे इस केस के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
अब पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—
- जावेद अहमद कब पूछताछ में शामिल होंगे?
- क्या यूनिवर्सिटी की गतिविधियों में कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था?
- क्या यह मामला सिर्फ धोखाधड़ी तक सीमित है या इसके पीछे कोई और बड़ी साजिश है?



