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Reading: डिजिटल उत्तराखंड की ओर बड़ा कदम: ‘देवभूमि परिवार विधेयक-2026’ पेश, अब परिवार की मुखिया होंगी महिलाएं
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उत्तराखंडफीचर्ड

डिजिटल उत्तराखंड की ओर बड़ा कदम: ‘देवभूमि परिवार विधेयक-2026’ पेश, अब परिवार की मुखिया होंगी महिलाएं

The Hill India News
Last updated: March 10, 2026 2:23 pm
The Hill India News
Published: March 10, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने प्रदेश में सुशासन और कल्याणकारी योजनाओं के पारदर्शी वितरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंगलवार को बजट सत्र के दौरान सरकार ने सदन के पटल पर “देवभूमि परिवार विधेयक- 2026” को प्रस्तुत किया। इस विधेयक का सबसे क्रांतिकारी पहलू यह है कि अब प्रदेश में बनने वाली नई ‘देवभूमि परिवार आईडी’ में परिवार की वरिष्ठतम महिला सदस्य (18 वर्ष से अधिक) को ही आधिकारिक तौर पर ‘मुखिया’ माना जाएगा।

Contents
एकीकृत डेटाबेस: योजनाओं के दोहराव पर लगेगा अंकुशमहिला सशक्तिकरण: वरिष्ठतम महिला सदस्य बनेगी मुखियाडेटा सुरक्षा और ‘जन विश्वास’ पर विशेष फोकसमुख्यमंत्री का विजन: “भ्रष्टाचार मुक्त और विकसित उत्तराखंड”सदन में अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों की भी रही गूँजउत्तराखंड के भविष्य का नया रोडमैपविधेयक की 5 बड़ी बातें:

यह विधेयक न केवल प्रशासनिक ढांचे को डिजिटल रूप से सशक्त करेगा, बल्कि राज्य में महिला सशक्तिकरण के एक नए युग की शुरुआत भी करेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे सुशासन की दिशा में ‘मील का पत्थर’ करार दिया है।


एकीकृत डेटाबेस: योजनाओं के दोहराव पर लगेगा अंकुश

वर्तमान में उत्तराखंड के विभिन्न विभाग (जैसे समाज कल्याण, खाद्य आपूर्ति, स्वास्थ्य आदि) अपनी योजनाओं के लिए अलग-अलग लाभार्थी डेटाबेस का उपयोग करते हैं। इससे डेटा के दोहराव (Duplication) और सत्यापन में देरी जैसी जटिलताएं पैदा होती हैं।

विधेयक के मुख्य उद्देश्य:

  • Single Source of Truth: ‘देवभूमि परिवार’ के माध्यम से एक एकीकृत और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस तैयार किया जाएगा। यह सभी विभागों के लिए सूचनाओं का एकमात्र विश्वसनीय स्रोत होगा।

  • पारदर्शिता और समन्वय: अलग-अलग पोर्टल पर भटकने के बजाय, एक ही आईडी से सभी सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। इससे विभागों के बीच समन्वय बढ़ेगा और फर्जी लाभार्थियों को हटाने में मदद मिलेगी।

  • संसाधनों का सही उपयोग: प्रशासनिक संसाधनों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम किया जाएगा, जिससे सरकारी सहायता सीधे और तेजी से जरूरतमंदों तक पहुँच सकेगी।


महिला सशक्तिकरण: वरिष्ठतम महिला सदस्य बनेगी मुखिया

धामी सरकार ने इस विधेयक के जरिए एक बड़ा सामाजिक संदेश दिया है। प्रस्तावित कानून के अनुसार, परिवार की 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम परिवार आईडी में ‘मुखिया’ के तौर पर दर्ज होगा।

यदि परिवार में 18 वर्ष से अधिक आयु की कोई महिला नहीं है, तो ही पुरुष सदस्य को मुखिया का दर्जा दिया जाएगा, लेकिन जैसे ही परिवार की कोई महिला सदस्य 18 वर्ष की आयु प्राप्त करेगी, मुखिया का पद स्वतः उसे हस्तांतरित हो जाएगा। यह प्रावधान न केवल महिलाओं को परिवार के निर्णयों में केंद्र में लाएगा, बल्कि बैंकिंग और सरकारी लाभों के हस्तांतरण में भी उनकी भूमिका को सशक्त करेगा।


डेटा सुरक्षा और ‘जन विश्वास’ पर विशेष फोकस

डिजिटल युग में निजता और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, यह पूरी प्रणाली डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 (DPDP Act 2023) के मानकों के अनुरूप विकसित की जाएगी।

  • सुरक्षित साझाकरण: विभागों के बीच डेटा का आदान-प्रदान पूरी तरह सुरक्षित और विनियमित होगा।

  • नागरिक सहमति: नागरिकों के डेटा का उपयोग केवल उनकी सहमति और पारदर्शिता के साथ कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

  • संस्थागत तंत्र: डेटा प्रबंधन और संरचनात्मक सुधारों के लिए एक विशेष संस्थागत निकाय का गठन किया जाएगा, जो इस पूरी प्रणाली की निगरानी करेगा।


मुख्यमंत्री का विजन: “भ्रष्टाचार मुक्त और विकसित उत्तराखंड”

विधेयक पेश करने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा:

“देवभूमि परिवार विधेयक-2026 सुशासन (Good Governance) की दिशा में हमारा सबसे बड़ा संकल्प है। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि यह सुनिश्चित होगा कि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को उसका हक बिना किसी देरी और भ्रष्टाचार के मिले। उत्तराखंड के नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए यह एकीकृत डेटाबेस एक रीढ़ की हड्डी की तरह काम करेगा।”


सदन में अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों की भी रही गूँज

मंगलवार का दिन उत्तराखंड विधानसभा के लिए विधायी कार्यों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। ‘देवभूमि परिवार विधेयक’ के साथ-साथ सरकार ने कई अन्य अहम संशोधन विधेयक भी सदन में रखे:

  1. उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक 2026: राज्य में अवैध जुए और सट्टेबाजी पर लगाम कसने के लिए।

  2. उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं संशोधन विधेयक: जेलों के आधुनिकीकरण और सुधार के लिए।

  3. अल्पसंख्यक आयोग और भाषा संस्थान संशोधन विधेयक: संबंधित संस्थानों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु।

  4. उत्तराखंड जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026: व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से।


उत्तराखंड के भविष्य का नया रोडमैप

‘देवभूमि परिवार विधेयक-2026’ केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि यह तकनीक और सामाजिक न्याय का एक अनूठा संगम है। जहाँ एक ओर यह ‘वन फॅमिली, वन आईडी’ की तर्ज पर राज्य के लाभार्थियों की सटीक पहचान करेगा, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को घर का मुखिया बनाकर समाज की सोच में बड़े बदलाव की नींव रखेगा। यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास अपना सबसे सटीक और पारदर्शी नागरिक डेटाबेस है।


विधेयक की 5 बड़ी बातें:

  • महिला नेतृत्व: 18+ आयु की महिला सदस्य ही परिवार की मुखिया।

  • स्मार्ट गवर्नेंस: सभी विभागों के लिए एक ही सत्यापित डेटाबेस।

  • भ्रष्टाचार पर वार: डेटा दोहराव और फर्जीवाड़े का होगा अंत।

  • डेटा प्रोटेक्शन: DPDP एक्ट 2023 के तहत नागरिकों की जानकारी सुरक्षित।

  • सहज सेवा: लाभार्थियों को बार-बार दस्तावेज जमा करने से मिलेगी मुक्ति।

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