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उत्तराखंड में औद्योगिक विकास को नई रफ़्तार देने के लिए, सिडकुल के निदेशक मंडल की 67वीं बैठक आयोजित 

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा—‘अगले 25 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनेगी नई औद्योगिक नीति’

देहरादून, 15 नवंबर 2025। उत्तराखंड के औद्योगिक ढांचे को अगले पच्चीस वर्षों की आवश्यकताओं और अवसरों के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से सिडकुल (SIDCUL) के निदेशक मंडल की 67वीं बैठक शनिवार को सिडकुल मुख्यालय में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने की और राज्य के औद्योगिक विकास को ‘नई दिशा और नई गति’ देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड अब उस दौर में है जहाँ उसे विजन-2050 की सोच के साथ अपनी औद्योगिक रणनीति तैयार करनी होगी। उन्होंने विभागों को निर्देश दिए कि वे बदलती तकनीक, नए निवेश पैटर्न और वैश्विक बाजार के परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए ठोस और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करें।


‘राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट औद्योगिक हब विकसित किए जाएँ’

मुख्य सचिव बर्द्धन ने प्रदेश के विविध भौगोलिक स्वरूप—पर्वतीय और मैदानी—दोनों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रवार औद्योगिक हब विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि—

“पर्वतीय क्षेत्रों में भी रोजगार आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएँ हैं। इन संभावनाओं की पहचान करके ऐसे उद्योग विकसित किए जाएँ जो स्थानीय संसाधनों, मानव कौशल और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखें।”

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्वतीय क्षेत्रों के लिए

  • हर्बल आधारित उद्योग
  • हस्तशिल्प एवं हैंडीक्राफ्ट
  • माइक्रो-फूड प्रोसेसिंग
  • पर्यटन सहयोगी उद्योग
    जैसे क्षेत्रों में मॉडल इंडस्ट्रियल जोन की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए।

‘उद्योग विभाग और अन्य संस्थाएँ प्रो-एक्टिव होकर काम करें’

बैठक में मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि औद्योगिक विकास को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए विभागों की कार्यशैली में गति और पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने कहा—

“उद्योगों को आवश्यक सुविधाएँ देने में देरी या जटिलताओं को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभागों को समन्वय और तत्परता के साथ कार्य करना होगा।”

विशेष रूप से उन्होंने निम्न बिंदुओं पर संज्ञान लेने के निर्देश दिए—

  • औद्योगिक क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
  • आवंटित औद्योगिक भूखंडों पर तय समयसीमा में इकाइयों की स्थापना सुनिश्चित की जाए।
  • नए उद्योग लगाने वालों को सिंगल विंडो सिस्टम को और प्रभावी बनाया जाए।
  • निवेश आकर्षित करने के लिए व्यावसायिक सुगमता (Ease of Doing Business) को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा जाए।

स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए फ्लैटेड फैक्टरी मॉडल

बैठक में हरिद्वार स्थित नवनिर्मित फ्लैटेड फैक्टरी के आवंटन पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि—

  • उपलब्ध इकाइयों का आवंटन लॉटरी प्रणाली से किया जाए,
  • और इसमें स्टार्टअप्स व लघु उद्योगों को प्राथमिकता दी जाए।

यह कदम उन उद्यमियों के लिए राहत साबित होगा जिन्हें बड़े भूखंडों की आवश्यकता नहीं होती और जिनके लिए साझा ढांचा अधिक व्यावहारिक है।


अप्रयुक्त परिसंपत्तियों का उपयोग—राज्य की आर्थिक क्षमता को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

मुख्य सचिव ने सिडकुल को निर्देश दिया कि उनके पास मौजूद—

  • अप्रयुक्त भूमि,
  • सम्पत्तियों,
  • और उपलब्ध संसाधनों का विस्तृत ब्यौरा तैयार किया जाए

ताकि इन्हें राज्य की औद्योगिक रणनीति में उपयोग किया जा सके। उन्होंने जोर दिया कि—

“राज्य की हर परिसंपत्ति को आर्थिक विकास में योगदान देने के लिए सक्षमता के साथ उपयोग में लाया जाना चाहिए।”


IT Hub, Semiconductor Industry और Data Center—नए दौर के उद्योगों पर फोकस

बैठक में अगले दशक के प्रमुख हाई-टेक उद्योगों के विकास पर गंभीर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि—

  • आईटी हब,
  • सेमीकंडक्टर निर्माण,
  • डाटा सेंटर,
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण,
  • तथा उन्नत सेवाक्षेत्र उद्योग

के लिए अनुकूल इको सिस्टम विकसित करना राज्य की भविष्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने संबंधित विभागों को ये सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि उत्तराखंड निवेश के लिए एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी राज्य साबित हो।


नए औद्योगिक आस्थानों और विद्युत ढांचे के विस्तार पर महत्वपूर्ण निर्णय

बैठक में प्राग फार्म, खुरपिया, नेपा और रानीपोखरी क्षेत्रों में औद्योगिक आस्थान विकसित करने के प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रमुख फैसलों में—

  • खुरपिया फार्म सहित नए औद्योगिक क्षेत्रों तक ट्रांसमिशन लाइनें और नए सब-स्टेशन स्थापित किए जाएँगे,
  • मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों में सब-स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई जाएगी,
  • सड़क, पानी, बिजली और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष निवेश किया जाएगा।

इससे नए निवेशकों को बेहतर अवसंरचना उपलब्ध हो सकेगी और उद्योगों के लिए वातावरण और आकर्षक बनेगा।


सिडकुल को अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने की दिशा में कदम

मुख्य सचिव ने सिडकुल को और अधिक सशक्त बनाने के लिए—

  • तकनीकी समिति,
  • और अन्य उप-समितियों

के गठन के निर्देश दिए, ताकि परियोजनाओं की समीक्षा, व्यवहार्यता अध्ययन और तकनीकी मूल्यांकन वैज्ञानिक ढंग से हो सके।


वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों की उपस्थिति

बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव वित्त दिलीप जावलकर, सचिव उद्योग विनय शंकर पांडेय, SIDCUL के प्रबंध निदेशक डॉ. सौरभ गहरवार, SIDBI के डीजीएम सिद्धार्थ मंडल, स्वतंत्र निदेशक अविनाश विरमानी और पुनीत वाधवा सहित विभिन्न वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


उत्तराखंड एक नए औद्योगिक युग की ओर

सिडकुल बोर्ड बैठक के निर्णयों से साफ है कि उत्तराखंड सरकार गति, पारदर्शिता और नवाचार को केंद्र में रखकर अगले 25 वर्षों के लिए मजबूत औद्योगिक बुनियाद तैयार कर रही है।

IT, हाई-टेक, MSME और पर्वतीय क्षेत्रों के रोजगार-आधारित उद्योगों पर फोकस, राज्य की औद्योगिक पहचान को एक नई ऊँचाई दे सकता है।

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